बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा कि उनकी पार्टी अगले महीने केरल में होने वाले विधानसभा चुनाव में हिस्सा लेगी. उनके इस ऐलान के बाद यह कयास लगाए जाने लगे कि बिहार की राजनीति में खासा दमखम रखने वाली राष्ट्रीय जनता दल (RJD) जिसका पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में ही खास जनाधार नहीं है, वो सुदूर केरल के चुनाव में क्या करेगी? खास बात यह है कि RJD ही नहीं बल्कि नीतीश कुमार की पार्टी JDU भी केरल की सियासत में कोई नई पार्टी नहीं है, वह पहले भी कई विधानसभा चुनाव लड़ चुकी है.
चुनाव आयोग ने कल रविवार को 5 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश के विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान कर दिया. केरल में एक ही चरण में चुनाव कराए जाएंगे, और यहां 9 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. परिणाम 4 मई को आएंगे. चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही यहां पर चुनावी हलचल में तेजी आ गई. तेजस्वी यादव ने कल ही यह ऐलान कर दिया कि उनकी पार्टी RJD केरल में वाम मोर्चा LDF के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी. यहां लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) का कांग्रेस की अगुवाई वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) से मुकाबला होगा.
लेफ्ट फ्रंट के साथ मैदान में उतरेगी RJD
केरल की सियासत में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने दमखम के साथ अपने पांव जमाना चाहती है, लेकिन काफी प्रयास के बाद उसके उम्मीद के मुताबिक कामयाबी नहीं मिली, हालांकि उसे यदा-कदा ही जीत हासिल हुई. अब लालू प्रसाद यादव की बनाई पार्टी का केरल में कैसा प्रदर्शन रहा है. बिहार में महागठबंधन की अगुवाई करने वाली आरजेडी भले ही केरल में चुनाव लड़ रही हो, लेकिन वह छोटी पार्टी के ही रूप में आंकी जाएगी.
बिहार में विपक्षी महागठबंधन में आरजेडी का जोरदार दबदबा है और यहां कांग्रेस के साथ-साथ लेफ्ट पार्टियां भी दूसरे दर्जे की पार्टी के रूप में गिनी जाती हैं, जबकि केरल में मामला इसके उलट है. वहां कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों का अपना दबदबा है. सत्ता की जंग इन्हीं दोनों दलों की अगुवाई वाले फ्रंट के बीच ही होता रहा है. बीजेपी भी यहां बेबस नजर आती है. तेजस्वी यादव ने केरल में चुनाव के लिए लेफ्ट फ्रंट के साथ जाने का ऐलान किया है.
कांग्रेस ने नहीं दिया भाव, अकेले उतरी
तो क्या लालू और तेजस्वी की पार्टी केरल में पहली बार चुनाव लड़ने जा रही है, नहीं. इससे पहले वह साल 2021 के विधानसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमा चुकी है. 5 साल पहले हुए विधानसभा चुनाव में लालू की पार्टी कांग्रेस की अगुवाई वाले UDF के साथ चुनाव लड़ना चाह रही थी और इसके लिए पार्टी से खुद के लिए कुछ सीटों की मांग की, लेकिन कांग्रेस ने इसे स्वीकार नहीं किया. लिहाजा, लालू ने अकेले ही अपने चुनाव चिन्ह के साथ चुनाव मैदान में उतरने का फैसला लिया.
पार्टी ने राज्य की 2 विधानसभा सीटों कोल्लम (Kollam) जिले की कुंदारा और पतनमतिट्टा (Pathanamthitta) जिले की रन्नी सीट (Ranni) से अपने उम्मीदवार उतारे थे. हालांकि पार्टी का प्रदर्शन इन दोनों ही सीटों पर बेहद फीका रहा. कुंदारा सीट पर पार्टी के प्रत्याशी विनोद बाहुलियन को महज 172 वोट ही हासिल हुए, जबकि रन्नी सीट के प्रत्याशी जोमोन कोचेथू के पक्ष में 339 वोट ही आए. इस तरह से पार्टी को 2021 के चुनाव में महज 511 वोट ही आए थे. अब देखना होगा कि लेफ्ट फ्रंट के साथ पार्टी का प्रदर्शन कैसा रहेगा.
RJD से बहुत पहले ही JDU सक्रिय
बिहार में आरजेडी की मुख्य प्रतिद्वंद्वी पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) लंबे समय से केरल की सियासत में सक्रिय रही है. हालांकि उसे भी पिछले 5 चुनाव में लगातार भागीदारी के बाद भी जीत हासिल नहीं हुई है.
साल 2021 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू ने एक सीट (कन्हनगाड) पर अपना प्रत्याशी खड़ा किया था, लेकिन उसके खाते में महज 87 वोट ही आए. इससे पहले 2016 के चुनाव में पार्टी ने अपना सबसे बड़ा दांव चला था और 7 प्रत्याशी मैदान में उतार दिए.
7 में से 6 सीट पर नंबर टू रही JDU
हालांकि उसे जीत तो हासिल नहीं हुई, लेकिन उसने कई सीटों पर खेल बिगाड़ दिया. 7 में से 6 सीट पर जेडीयू दूसरे नंबर पर रही है और एक सीट पर उसका प्रत्याशी तीसरे नंबर पर रहा. चुनाव में कुल पड़े वोटों (2,01,25,324) में से जेडीयू को 1.5 फीसदी यानी 2,96,585 वोट मिले थे.
इससे पहले साल 2011 और 2006 के चुनाव में जेडीयू ने एक-एक प्रत्याशी मैदान में उतारा था, लेकिन जीत इनसे भी दूर ही रही. 2006 के चुनाव में जेडीयू को 758 वोट तो 2011 के चुनाव में 2,772 वोट मिले थे. इससे पहले साल 2001 के चुनाव में पहली बार उतरते हुए जेडीयू ने अपने 3 प्रत्याशी केरल में उतारे थे, और उसके खाते में 2,636 वोट ही आए थे.
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