जबलपुर (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने शहडोल जिले में 3 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में विचारणीय निर्णय सुनाते हुए मुख्य दोषी को निचली अदालत द्वारा दी गई मृत्युदंड (फांसी) की सजा को 25 वर्ष के सश्रम कारावास में तब्दील कर दिया है।
हाई कोर्ट के जस्टिस विवेक अग्रवाल तथा जस्टिस एके सिंह की युगलपीठ ने फैसले में टिप्पणी करते हुए कहा कि मानव जीवन ईश्वर का अनमोल उपहार है। मौजूदा तथ्यों, परिस्थितियों तथा सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रतिपादित विधि सिद्धांतों के आलोक में अपीलकर्ता का जीवन इतनी आसानी से समाप्त नहीं किया जाना चाहिए।
🚨 पड़ोसी ने रची थी हैवानियत: मां के शादी समारोह में जाने के दौरान की वारदात
अभियोजन का पक्ष और घटनाक्रम:
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घटना की तारीख और स्थान: अभियोजन के अनुसार, यह वारदात 1 मार्च 2023 की रात शहडोल जिले के खैरहा थाना अंतर्गत ग्राम छिरहटी में घटित हुई थी।
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अकेले पाकर हमला: घटना के समय पीड़िता की मां आरोपी की पत्नी के साथ एक वैवाहिक कार्यक्रम में गई हुई थी। घर में अकेली मासूम को पाकर पड़ोसी राम नारायण उर्फ भानु धीमर ने उसके साथ दरिंदगी की।
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धमकी और अस्पताल में मौत: मां जब घर लौटी तो बच्ची की नाक से खून बह रहा था और आरोपी अत्यधिक शराब के नशे में था। आरोपी ने परिजनों को पुलिस में न जाने और बच्ची के पलंग से गिरने का बहाना बनाने की धमकी दी। गंभीर हालत में बच्ची को पहले बुढ़ार अस्पताल और फिर शहडोल मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां 7 मार्च 2023 को इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
🏛️ जिला अदालत ने माना था ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’: सुनाई थी फांसी की सजा
निचली अदालत का फैसला और साक्ष्य:
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मेडिकल व डीएनए साक्ष्य: पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मासूम की मृत्यु का मुख्य कारण सिर की हड्डी टूटना (Skull Fracture) और अत्यधिक यौन उत्पीड़न पाया गया। जांच में आरोपी की डीएनए रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई थी।
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सजा-ए-मौत: शहडोल जिला न्यायालय ने मामले को ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ (Rarest of Rare) की श्रेणी में मानते हुए मुख्य आरोपी राम नारायण को मृत्युदंड से दंडित किया था।
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सह-आरोपियों को कारावास: इसके अलावा साक्ष्य मिटाने और धमकाने के आरोप में आरोपी की पत्नी पिंकी और सहयोगी राजकुमार धीमर को 4-4 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई थी। मृत्युदंड की विधिवत पुष्टि के लिए यह मामला हाई कोर्ट भेजा गया था।
🔍 ‘सुधार और पुनर्वास की संभावना’: हाई कोर्ट ने इन आधारों पर दी राहत
हाई कोर्ट की युगलपीठ द्वारा रेखांकित किए गए प्रमुख बिंदु:
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कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं: अदालत ने पाया कि 32 वर्षीय मुख्य आरोपी का पहले से कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और न ही वह कोई पेशेवर या आदतन अपराधी है।
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सामाजिक पृष्ठभूमि: अदालत ने दर्ज किया कि अंतरजातीय विवाह के कारण आरोपी पहले से ही सामाजिक स्तर पर उपेक्षित जीवन जी रहा था, जिससे उसके समाज के लिए सतत खतरा बने रहने के साक्ष्य नहीं मिलते।
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उम्र और सुधार की गुंजाइश: वर्तमान आयु और परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी के सुधरने और पुनर्वास की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता, जिसके चलते मामला ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ की परिधि में नहीं आता।
🔓 पत्नी और सहयोगी बरी: मुख्य दोषी को बिना किसी छूट के 25 साल जेल
अंतिम निर्णय का सार:
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25 वर्ष का कठोर कारावास: युगलपीठ ने मृत्युदंड को निरस्त करते हुए मुख्य अभियुक्त को 25 वर्ष के वास्तविक कारावास की सजा सुनाई है, जिसमें उसे किसी भी प्रकार की समय-पूर्व रिहाई या छूट (Remission) का लाभ नहीं मिलेगा।
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सह-आरोपी दोषमुक्त: पर्याप्त और पुख्ता साक्ष्यों के अभाव में अदालत ने अधीनस्थ न्यायालय द्वारा आरोपी की पत्नी पिंकी और उसके साथी राजकुमार को सुनाई गई 4-4 साल की सजा को रद्द करते हुए दोनों को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
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