भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 11 अक्टूबर से शुरू होने वाले गरबा और अन्य आगामी धार्मिक आयोजनों को लेकर मध्य प्रदेश मुस्लिम त्योहार कमेटी ने एक अहम अपील जारी की है। कमेटी ने मुस्लिम युवाओं से शांति, संयम और पूर्ण रूप से धार्मिक मर्यादा बनाए रखने का आग्रह किया है। कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष जीशान रहमान उर्फ शानू ने युवाओं से अपील की है कि वे सभी धर्मों की आस्था और परंपराओं का पूरा सम्मान करें तथा देश के कानून का पूरी तरह पालन करें।
🚫 ‘रील्स और विवादों से दूर रहें युवा’
कमेटी के अध्यक्ष शानू ने विशेष रूप से मुस्लिम युवाओं को हिदायत देते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर लाइक्स, व्यूज और रील्स के चक्कर में किसी भी धार्मिक आयोजन में अनावश्यक रूप से शामिल होने से बचें।
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टकराव से दूरी: युवाओं से अपील की गई है कि वे किसी भी तरह के विवाद, टकराव, उकसावे या अनुचित प्रतिक्रिया से दूर रहें।
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परिवार और समाज की जिम्मेदारी: उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी एक व्यक्ति की गलती का गंभीर परिणाम पूरे परिवार और समाज को भुगतना पड़ सकता है। इसलिए हर युवा को अपने व्यवहार के प्रति खुद जिम्मेदार होना चाहिए और ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए जिससे शहर का सामाजिक माहौल खराब हो।
🏛️ शासन-प्रशासन को लिखा गया पत्र
कमेटी ने साफ किया है कि यह अपील किसी भी धर्म या गरबा आयोजनों के विरोध में नहीं है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को जिम्मेदार नागरिक बनने, धार्मिक मर्यादा का पालन करने और आपसी सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के प्रति जागरूक करना है। इसके साथ ही, कमेटी ने शासन-प्रशासन को भी एक पत्र लिखा है। पत्र के माध्यम से यह अनुरोध किया गया है कि 11 अक्टूबर से शुरू होने वाले पर्वों के मद्देनजर विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, तकनीकी और चिकित्सा संस्थानों व छात्रावासों के छात्रों तक यह संदेश पहुंचाने के लिए आवश्यक और एहतियाती कदम उठाए जाएं।
🛡️ पहचान और सुरक्षा को लेकर पहले भी उठते रहे हैं सवाल
गौरतलब है कि आगामी 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत होने जा रही है। नवरात्रि के इन दिनों में भोपाल समेत पूरे मध्य प्रदेश में गरबा और अन्य सांस्कृतिक-धार्मिक आयोजन बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाए जाते हैं। हालांकि, राज्य और देश के अन्य हिस्सों में गरबा आयोजनों के दौरान मुस्लिम युवाओं की भागीदारी को लेकर हिंदू संगठनों और कुछ राजनीतिक नेताओं द्वारा अक्सर सवाल खड़े किए जाते रहे हैं, तथा आयोजनों में प्रवेश के समय पहचान-पत्र (ID Proof) की जांच की मांग भी उठती रही है। इसी पृष्ठभूमि में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह अपील बेहद अहम मानी जा रही है।
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