भोपाल के गुनगा क्षेत्र में एक गृहिणी सोशल मीडिया पर पुराने नोटों को ऊंची कीमत पर बेचने का विज्ञापन देखकर ठगी का शिकार हो गई। महिला ने 5 रुपये के ‘ट्रैक्टर वाले नोट’ के बदले लाखों रुपये मिलने के लालच में आकर अपने 1.91 लाख रुपये गंवा दिए। पुलिस ने पीड़ित महिला की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया है और साइबर सेल की मदद से ठगों की तलाश की जा रही है।
📱 कैसे फंसी झांसे में?
गुनगा क्षेत्र की रहने वाली अंतिम विश्वकर्मा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो देखा, जिसमें पुराने 5 रुपये के ट्रैक्टर वाले नोट के बदले लाखों रुपये देने का दावा किया गया था। वीडियो में दिए गए नंबर पर संपर्क करने के बाद, ठगों ने उनसे आधार कार्ड और नोट की फोटो मंगवाई। विश्वास जीतने के लिए उन्होंने महिला को बताया कि उनके नोट की कीमत 23 लाख रुपये तय की गई है।
💸 फाइल चार्ज और टैक्स के नाम पर वसूली
ठगों ने पूरी प्रक्रिया को असली दिखाने के लिए मुंबई की एक फर्जी कंपनी के दस्तावेज महिला को भेजे। इसके बाद उन्होंने अलग-अलग शुल्कों के नाम पर महिला से पैसे ऐंठना शुरू किया:
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पंजीकरण और फाइल चार्ज
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जीएसटी (GST) शुल्क
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इनकम टैक्स क्लीयरेंस
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डाटा एंट्री शुल्क महिला ने बार-बार भरोसे में आकर कुल 1.91 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए। जब ठगों ने और अधिक पैसों की मांग जारी रखी, तो महिला को ठगी का एहसास हुआ।
🛡️ सतर्कता बरतें: साइबर ठगों से ऐसे बचें
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने कई फर्जी मोबाइल नंबरों और यूपीआई (UPI) खातों का इस्तेमाल किया था। साइबर विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि:
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कभी भी किसी अनजान व्यक्ति या सोशल मीडिया वीडियो के भरोसे अपनी निजी जानकारी (जैसे आधार कार्ड आदि) शेयर न करें।
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पुराने नोट या सिक्के खरीदने-बेचने का कोई भी सरकारी प्राधिकृत पोर्टल नहीं है, इसलिए किसी भी ‘रजिस्ट्रेशन फीस’ या ‘टैक्स’ के नाम पर पैसे न दें।
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किसी भी प्रकार की संदिग्ध मांग होने पर तुरंत नजदीकी साइबर सेल या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत करें।
संपादकीय टिप्पणी: क्या आपको लगता है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ऐसे ‘धोखाधड़ी वाले विज्ञापनों’ को रोकने के लिए अपनी स्क्रीनिंग प्रक्रिया और अधिक सख्त करनी चाहिए? अपने विचार नीचे साझा करें।
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