इंदौर : मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में धार की भोजशाला मामले की सुनवाई जारी है. पुरातत्व विभाग को 98 दिन तक चले सर्वे की पूरी वीडियोग्राफी मुस्लिम पक्ष को उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए गए हैं. एएसआई को 27 अप्रैल तक किसी भी स्थिति में सभी पक्षों को वीडियो क्लिप उपलब्ध करानी होगी. मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद की ओर से तर्क रखे गए. इस दौरान अधिवक्ताओं ने अयोध्या मामले से जुड़े कोर्ट के आदेश को भी कोर्ट में पेश किया गया.
अयोध्या मंदिर मामले के फैसले का हवाला
कमाल मौला वेलफेयर ट्रस्ट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट के समक्ष उपस्थित हुए. सलमान खुर्शीद ने अयोध्या के बाबरी ढांचे के समय सुनाए गए निर्णय के आधार पर अपने तथ्य पेश किए. उनके सहायक के रूप में एडवोकेट नूर मोहम्मद शेख ने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए अपने तर्क रखे. उन्होंने कहा कि एएसआई रिपोर्ट की स्वीकार्यता और उनके मूल्यांकन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जो सिद्धांत तय किए हैं, वहीं इस पूरे मामले में लागू होते हैं.
एएसआई की सर्वे पर उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान सर्वे की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए. कहा गया सर्वे के दौरान कई स्थानों पर खुदाई ऐसे तरीके से की गई जिससे भोजशाला को नुकसान पहुंचा और कुछ अवशेषों का एकतरफा तरीके से रिकॉर्ड में शामिल करने की कोशिश की गई. सर्वे के दौरान मुस्लिम पक्ष से जुड़े अवशेषों को नजरअंदाज किया गया. याचिकाकर्ता अब्दुल समद ने कहा वीडियोग्राफी से सच्चाई सामने आएगी और अदालत के सामने उनकी आपत्तियों को मजबूती मिलेगी. खुदाई के दौरान हिंदू, मुस्लिम, जैन और बौद्ध चारों के अवशेष मिले हैं, जिन्हें वीडियोग्राफी में शामिल जरूर किया जाए.
धार जिला अदालत में याचिका का जिक्र
इससे पहले जीवरान, अयाज और फिरोज की ओर से हाई कोर्ट में उनके अधिवक्ता ने तर्क रखे. धार जिला कोर्ट में लगाए गए सिविल सूट की जानकारी दी गई. साथ ही कहा गया कि वह जमीन का मुद्दा है. जमीन के मुद्दे की सुनवाई सिविल कोर्ट में होती है, जिसके चलते धार जिला कोर्ट में लगे सिविल सूट में सुनवाई होनी चाहिए. पहले यहां मंदिर था या मस्जिद थी, इसको लेकर सुनवाई होना चाहिए. दोनों पक्षों की गवाही सिविल कोर्ट के समक्ष होना चाहिए.
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