Bhojshala Dispute: ‘कभी मंदिर, कभी मस्जिद…’ मुस्लिम पक्ष ने ASI सर्वे पर उठाए सवाल, जानें हाई कोर्ट में क्या हुई बहस

मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में सोमवार को धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद को लेकर सुनवाई हुई. इस दौरान कोर्ट को बताया गया कि विवादित स्मारक के धार्मिक स्वरूप पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) का रुख समय-समय पर विभिन्न याचिकाओं में दिए गए बयानों में असंगत रहा है

मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में साफ लफ्जों में कहा कि जिसे पहले ही मस्जिद माना जा चुका है, उसे बार-बार मंदिर बताना व सिर्फ भ्रामक है बल्कि यह न्यायिक प्रक्रिया को गुमराह करने की कोशिश भी है. सुनवाई में इंटरविनर(Intervener) जकुल्ला की तरफ से ASI की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए.

ASI की रिपोर्ट पर उठाए सवाल

इंटरवीनर (Intervener) पक्ष की तरफ से सीनियर एडवोकेट शोभा मेनन ने कमाल मौला मस्जिद वेलफेयर ट्रस्ट का पक्ष रखा. उन्होंने ASI की रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे संदेहास्पद बताया. उन्होंने ASI के अलग-अलग समय पर दिए गए बयानों में विरोधाभास को बताया. उन्होंने कहा कि पहले विवादित स्थल को न मंदिर, न मस्जिद बताया गया. वहीं अब ASI इसे मंदिर बता रही है इससे संदेह पैदा होता है और याचिकाकर्ताओं को समर्थन मिलने का संकेत मिलता है.

‘ASI कोर्ट को गुमराह नहीं कर सकता’

मेनन ने कहा कि साल 1998 में ASI ने एक याचिका के जवाब में कहा था कि भोजशाला मंदिर है या मस्जिद, इस बारे में निश्चित तौर पर कुछ भी नहीं कहा जा सकता, लेकिन आज ASI इस भोजशाला को मंदिर बता रहा है. उन्होंने कहा कि ASI किसी भी परिस्थिति में इस कोर्ट को गुमराह नहीं कर सकता. एक दिन आप कहते हैं कि यह मस्जिद नहीं है, फिर आप कहते हैं कि यह मंदिर नहीं है.

‘भवन कोई जीवित वस्तु नहीं है…’

इंदौर हाई कोर्ट की डबल बेंच, जिसमें जज विवेक शुक्ला और आलोक अवस्थी शामिल हैं. उनके सामने मेनन ने साफ कहा कि किसी भी संरचना की पहचान मनमाने तरीके से बदलना मुमकिन नहीं है. उन्होंने कहा कि भवन कोई जीवित वस्तु नहीं है जिसका स्वरूप अपनी मर्जी के मुताबिक बदल दिया जाए. उन्होंने कहा कि इसके लिए ठोस सबूत जरूरी हैं.

‘यह मामला स्वामित्व विवाद का है’

शोभा मेनन ने ने कोर्ट में कहा कि यह मामला जनहित याचिका नहीं, बल्कि स्वामित्व विवाद का है, जिसकी सुनवाई सिविल कोर्ट में ही होनी चाहिए. उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ताओं ने आर्टिकल 226 के तहत जनहित याचिका दायर की है, जबकि यह स्पष्ट रूप से दीवानी का मामला है. उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट को इस पर भारी कॉस्ट लगानी चाहिए.

मेनन ने मंदिर पक्ष के याचिकाकर्ता हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस और कुलदीप तिवारी की याचिकाओं को भी निरस्त करने की मांग करते हुए कहा कि दोनों की मांग है कि हिंदुओं को भोजशाला में 24 घंटे पूजा का अधिकार मिले और नमाज पढ़ने वालों को बाहर किया जाए.

भोजशाला सर्वे का वीडियो हाई कोर्ट में पेश

वहीं ASI की तरफ से वकील सुनील जैन ने कोर्ट को बताया कि भोजशाला सर्वे का वीडियो फुटेज सील्ड हार्ड ड्राइव में हाई कोर्ट में पेश कर दिया गया है. थ ही यह जानकारी भी दी गई कि सर्वे का वीडियो ईआरपी सिस्टम पर अपलोड कर दिया गया है, जिससे प्रतिवादी कमाल मौला मस्जिद वेलफेयर सोसायटी को देखने की सुविधा दी गई है.

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