कोरबा के बांगो बांध ने तोड़ा 3 साल का रिकॉर्ड: 83% से अधिक भरा जलाशय, जल्द खुल सकते हैं गेट

छत्तीसगढ़

कोरबा (छत्तीसगढ़): 31 जुलाई की स्थिति में कोरबा जिले के प्रसिद्ध मिनीमाता बांगो बांध का जलस्तर और जल भंडारण पिछले तीन वर्षों के मुकाबले अपने सर्वाधिक स्तर पर पहुंच गया है।

वर्तमान में बांगो जलाशय का जलस्तर 356.80 मीटर दर्ज किया गया है। वहीं, इसकी उपयोगी जल भंडारण क्षमता 2412.17 मिलियन घन मीटर (MCuM) तक पहुंच चुकी है, जो बांध की कुल उपयोगी क्षमता का 83.34 प्रतिशत है।

📊 पिछले 3 वर्षों में जलभराव की सबसे बेहतर स्थिति, देखें तुलनात्मक आंकड़े

यद्यपि इस वर्ष मानसून की सक्रियता थोड़ी देर से हुई, परंतु वर्तमान में जलभराव की स्थिति विगत तीन वर्षों की तुलना में सबसे मजबूत और बेहतर दर्ज की गई है:

  • वर्ष 2025 (31 जुलाई): जलस्तर 355.10 मीटर तथा उपयोगी जल भंडारण 2147.29 MCuM था।

  • वर्ष 2024 (31 जुलाई): जलस्तर 349.70 मीटर तथा भंडारण मात्र 1413.58 MCuM दर्ज किया गया था।

  • वर्ष 2023 (31 जुलाई): जलस्तर 354.30 मीटर तथा भंडारण 2028.71 MCuM था।

🌾 बहुउद्देशीय बांगो परियोजना से कृषि और पावर सेक्टर को मिलेगा बड़ा लाभ

मिनीमाता बांगो बांध छत्तीसगढ़ की एक अत्यंत महत्वपूर्ण बहुउद्देशीय परियोजना है।

जल संसाधन विभाग के अनुसार, इस वर्ष कैचमेंट एरिया में हुई पर्याप्त और निरंतर बारिश के कारण बांगो बांध में पानी की उपलब्धता बेहद शानदार बनी हुई है। इससे आने वाले समय में खरीफ फसलों की सिंचाई के लिए किसानों को प्रचुर मात्रा में पानी मिल सकेगा। इसके साथ ही, स्थानीय स्तर पर पेयजल आपूर्ति सुचारू रहेगी तथा कोरबा के पावर सेक्टर और उद्योगों को भी इसका सीधा लाभ पहुंचेगा।

🌊 जलस्तर 90% से अधिक होने पर खुल सकते हैं गेट, निचले इलाकों में अलर्ट

जलभराव की वर्तमान रफ्तार को देखते हुए इस वर्ष बांगो बांध के गेट खोले जाने की प्रबल संभावना बन रही है।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, जब बांध का जलभराव 90 प्रतिशत से ऊपर पहुंचता है, तभी नियमानुसार सुरक्षा के दृष्टिकोण से गेट खोले जाते हैं। यदि 90 प्रतिशत के बाद भी कैचमेंट एरिया से पानी की आवक लगातार जारी रहती है, तो बांध के रेडियल गेट खोलकर अतिरिक्त जल को हसदेव नदी में विसर्जित किया जाता है।

ऐसी स्थिति में नदी के निचले तटीय इलाकों में स्थित गांवों और बस्तियों को बाढ़ के खतरे से बचाने के लिए पूर्व इंतजाम किए जाते हैं तथा मुनादी कराकर अलर्ट जारी किया जाता है। इसके लिए स्थानीय निवासियों के साथ-साथ प्रशासनिक अधिकारियों को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है।

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