भारत सरकार और राज्य सरकार द्वारा देश की समृद्ध कला, संस्कृति और इतिहास को बढ़ावा देने के लिए लगातार टूरिस्ट सर्किट का निर्माण किया जा रहा है। इसी कड़ी में पुरातात्विक महत्व के मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक स्थानों को पर्यटन की दृष्टि से और अधिक विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। देश के जाने-माने पुरातत्वविद् और अमरकंटक स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय के पुरातत्व विभाग के प्रोफेसर मोहनलाल चढ़ार ने मध्य भारत में पर्यटन और कला-संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए बुंदेलखंड और मालवा के महत्वपूर्ण प्राचीन स्थलों को एक ही टूरिस्ट सर्किट से जोड़ने का अनूठा सुझाव दिया है।
🗺️ खजुराहो, मढ़खेरा सूर्य मंदिर, ओरछा और एरण को एक सूत्र में पिरोने का प्रस्ताव
प्रो. मोहनलाल चढ़ार के अनुसार, बुंदेलखंड की विश्व विरासत ‘खजुराहो’ से यात्रा शुरू होकर टीकमगढ़ के मढ़खेरा सूर्य मंदिर, ओरछा के रामराजा मंदिर, देवगढ़, ऐतिहासिक एरण, मंडी बामोरा, ग्यारसपुर, उदयगिरि, विदिशा के बैसनगर, सांची, भोजपुर और अंत में भीमबेटका तक एक भव्य टूरिस्ट सर्किट तैयार किया जा सकता है। इस सर्किट के बनने से मध्य भारत के सभी प्रमुख पुरातात्विक और ऐतिहासिक स्थल एक ही रूट पर आ जाएंगे। एरण के पास गुप्तकालीन कलाकृतियों, भगवान विष्णु की 13 फीट ऊंची प्रतिमा, वराह और हूण शासक तोणमाल के अभिलेखों के साथ-साथ यह सर्किट प्राचीन काल के कई अनछुए पहलुओं को दुनिया के सामने लाएगा।
🚀 पर्यटकों की संख्या बढ़ने से क्षेत्रीय रोजगार और आर्थिक स्थिति को मिलेगी मजबूती
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इन ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थलों को एक टूरिस्ट सर्किट के रूप में विकसित करती है, तो इससे न केवल देशी-विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने में मदद मिलेगी, बल्कि मध्य भारत की आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। खजुराहो, सांची, भीमबेटका और भोजपुर जैसे विश्व प्रसिद्ध स्थलों के साथ-साथ एरण और उदयगिरि की गुफाओं जैसी अद्वितीय धरोहरों को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान मिल सकेगी।
What do you feel about this post?
Like
Love
Happy
Haha
Sad