महाराष्ट्र सरकार ने सूचना का अधिकार (RTI) नियमों में किए गए हालिया विवादास्पद संशोधनों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह फैसला सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे द्वारा 5 जुलाई से रालेगण सिद्धि में शुरू की जाने वाली अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की चेतावनी के बाद लिया गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सूचना के मुख्य आयुक्त को नए नोटिफाई किए गए नियमों को स्थगित करने के निर्देश दिए हैं।
📢 अन्ना हजारे का विरोध: RTI की मूल भावना से समझौता क्यों?
अन्ना हजारे ने सरकार के इन संशोधनों को RTI कानून की मूल भावना के खिलाफ बताया था। उन्होंने सीएम फडणवीस को पत्र लिखकर स्पष्ट किया था कि नए नियम सरकारी जवाबदेही को कमजोर करते हैं और आम नागरिकों के लिए जानकारी प्राप्त करने की प्रक्रिया को जटिल बनाते हैं। अन्ना का आरोप था कि ये नियम बिना किसी सार्वजनिक परामर्श (Public Consultation) के थोपे गए थे। उन्होंने सरकार से मांग की है कि RTI एक्सपर्ट्स, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ चर्चा करके ही भविष्य में कोई नया नियम बनाया जाए।
📝 क्या थे वे विवादित नियम, जिन्हें सरकार ने फिलहाल रोका?
महाराष्ट्र सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 12 जून को जारी नोटिफिकेशन में कई ऐसे प्रावधान थे, जिन्हें लेकर भारी विरोध हो रहा था:
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भारी आवेदन शुल्क: RTI के तहत जानकारी मांगने के लिए 730 रुपये की मोटी फीस का प्रावधान रखा गया था।
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शब्द सीमा: आवेदन की लंबाई 150 शब्दों से अधिक नहीं हो सकती थी।
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एक आवेदन, एक विषय: एक आवेदन में केवल एक ही विषय पर जानकारी मांगी जा सकती थी। इससे अधिक विषय होने पर PIO को केवल पहले विषय पर ही कार्रवाई करने का अधिकार था।
⚖️ लोकतंत्र में पारदर्शिता की जीत
अन्ना हजारे ने इन बदलावों को ‘सूचना के अधिकार का गला घोंटने’ वाला कदम करार दिया था। अब सरकार द्वारा इन पर रोक लगाने से उन लाखों RTI कार्यकर्ताओं को राहत मिली है, जो शासन में पारदर्शिता लाने के लिए इस कानून का उपयोग करते हैं। सरकार का यह कदम लोकतंत्र में जन-आंदोलन और नागरिक अधिकारों की एक बड़ी जीत माना जा रहा है।
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