पलवल: पलवल में बंदरों और कुत्तों के भारी आतंक के चलते हजारों लोग इनके शिकार होते हैं। पिछले 4 महीने में ही अकेले पलवल के जिला अस्पताल में लगभग 4000 लोगों ने एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाया है। इसके अलावा होटल हसनपुर हथीन और दुधौला में भी सरकारी हॉस्पिटल है इनके अलावा सैंकड़ों निजी हॉस्पिटल भी हैं जहां पर जाकर लोग एंटी रेबीज के इंजेक्शन लगाते हैं। जिसका आंकड़ा इस संख्या से अलग है।
लोगों को पहले तो कुत्ते व बंदरो के काटने का दर्द और उसके बाद इंजेक्शन लगवाने का दर्द सहना पड़ रहा है। सुप्रीम कोर्ट के बार-बार की चेतावनी और आदेशों के बावजूद भी गलियों में और सड़कों पर हजारों की संख्या में आवारा कुत्ते और बंदर घूमते रहते हैं और लोगों को अपना शिकार बनाने के लिए मंडराते रहते हैं।
वी/ओ 1 अगर हम पलवल में ही कुत्ते और बंदर आदि के काटने के बाद जिला अस्पताल में जाकर एंटी रेबीज का इंजेक्शन लगवाने वालों की संख्या बताएं तो अक्टूबर 2025 में कल 890 लोगों ने पलवल के जिला अस्पताल में जाकर एंटी रेबीज का इंजेक्शन लगाया था जिनमें 689 लोगों को आवारा और पालतू कुत्तों ने काट खाया था तथा 42 लोगों को बिल्ली ने और 12 लोगों को बंदर ने काटा था। इसके अलावा 103 अन्य लोगों को कुत्ते या अन्य पालतू जानवरों ने पंजे आदि मारे थे।
नवंबर महीने में कुल 978 लोगों ने अस्पताल में जाकर एंटी रेबीज का इंजेक्शन लगवाया है जिनमें से 845 लोगों को आवारा और पालतू कुत्तों ने काटा है । इस महीने में दो लोगों को बिल्ली ने काटा है और 12 लोगों को बंदर ने काटा था। दिसंबर की बात करें तो दिसंबर का महीना लोगों के लिए और ज्यादा खटक रहा है जिसमें कुल 1313 लोगों ने नागरिक अस्पताल में जाकर ऐंटी रेबीज का इंजेक्शन लगाया था। इस महीने में 24 लोगों को बिल्ली और 15 लोगों को बंदरों ने काटा था वही बात करें जनवरी महीने में तो अभी तक लगभग 760 लोगों ने पलवल के नागरिक अस्पताल में जाकर एंटी रेबीज कंजक्शन लगाया है।
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