चंडीगढ़: हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दावे में कहा है कि 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अंबाला छावनी की भूमिका ऐतिहासिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण रही है। उनके अनुसार, उत्तर प्रदेश के मेरठ में 10 मई 1857 को विद्रोह भड़कने से करीब नौ घंटे पहले ही अंबाला छावनी में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह की शुरुआत हो चुकी थी। अंबाला के इन महान क्रांतिकारियों और शहीदों के योगदान को राष्ट्रीय तथा वैश्विक स्तर पर उचित पहचान दिलाने के उद्देश्य से ही हरियाणा सरकार द्वारा अंबाला छावनी में स्वतंत्रता की पहली लड़ाई का यह भव्य शहीद स्मारक तैयार किया गया है।
💰 800 करोड़ की लागत और 22 एकड़ में फैला अत्याधुनिक परिसर
अनिल विज ने इस स्मारक के निर्माण, इसकी तकनीकी विशेषताओं और 1857 के संग्राम में हरियाणा के योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस स्मारक का निर्माण कार्य पूरी तरह से पूरा हो चुका है और इसके उद्घाटन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से समय मांगा गया है।
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लागत और क्षेत्रफल: राष्ट्रीय राजमार्ग-44 के किनारे लगभग 22 एकड़ भूमि पर विकसित इस शहीद स्मारक की कुल लागत करीब 800 करोड़ रुपये है।
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कमल के आकार का टावर: परिसर का मुख्य आकर्षण 63 मीटर ऊंचा कमल के आकार का टावर है। 1857 के संग्राम से जुड़े ‘कमल और रोटी’ के ऐतिहासिक प्रतीक को ध्यान में रखते हुए इसकी संरचना तैयार की गई है, जिसमें कांच की लिफ्ट और शीर्ष पर स्काई कैफे की सुविधा भी दी गई है।
🖼️ 23 डिजिटल गैलरियां और 700 से अधिक बलिदानियों के नाम
इस स्मारक को आधुनिक तकनीक और ऐतिहासिक संग्रहालय के बेहतरीन समन्वय के साथ विकसित किया गया है।
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डिजिटल गैलरियां: परिसर में कुल 23 आधुनिक गैलरियां बनाई गई हैं, जिन्हें बारीकी से देखने में लगभग छह घंटे का समय लग सकता है। इनमें 1857 की क्रांति के कारणों, अंबाला छावनी की घटनाओं और देश भर के संघर्षों को दर्शाया गया है। इसके अलावा राव तुलाराम, राजा नाहर सिंह, रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे और मंगल पांडे जैसे प्रमुख सेनानियों की गाथाएं भी प्रदर्शित हैं।
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शहीदों के स्वर्ण अक्षर: इतिहासकारों और शिक्षाविदों की मदद से खोजे गए 700 से अधिक बलिदानियों के नाम संगमरमर की दीवारों पर स्वर्ण अक्षरों में उकेरे गए हैं।
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अन्य सुविधाएं: यहाँ 3D प्रोजेक्शन मैपिंग, लेजर शो, साउंड एंड लाइट शो, 2,500 दर्शकों की क्षमता वाला ओपन एयर थिएटर, 300 सीटों का एसी ऑडिटोरियम, हेलीपैड और भूमिगत पार्किंग जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं भी मौजूद हैं। उद्घाटन के बाद यह स्थल ऐतिहासिक शोध और पर्यटन का एक बड़ा केंद्र बनेगा।
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