रांची: लोकायुक्त के बाद झारखंड में लंबे समय से अध्यक्ष के अभाव में विरान पड़ा विधि आयोग गुलजार होने वाला है. राज्य सरकार के विधि विभाग ने इस संदर्भ में आयोग के नये अध्यक्ष को लेकर कवायद शुरू कर दी है. गौरतलब है कि राज्य में न्यायिक सेवा से सेवानिवृत्त हुए वर्तमान समय में कई जज हैं, जिनमें से किसी एक को सरकार जिम्मेदारी दे सकती है.
इधर, राज्य विधि आयोग बदहाल पड़ा हुआ है. एकमात्र आदेशपाल मुन्ना कुमार के भरोसे चल रहा विधि आयोग प्रतिदिन समय से इस उम्मीद के साथ खुलता है कि कभी ना कभी अध्यक्ष का मनोनयन होगा और यहां कामकाज शुरू होगा. मुन्ना बताते हैं कि इस आयोग में चार लोग कार्यरत हैं जिसमें से तीन विधि आयोग में डेपुटेशन पर कार्यरत हैं. मैं प्रतिदिन साफ सफाई कर कार्यालय में रहता हूं, हमें उम्मीद है कि लोकायुक्त की तरह यहां भी जल्द ही नये अध्यक्ष का पदस्थापन होगा.
नवंबर 2027 तक है राज्य विधि आयोग का कार्यकाल
झारखंड में विधि आयोग का गठन तत्कालीन राज्य सरकार के द्वारा 13 नवंबर 2002 को किया गया था, जिसके बाद से आयोग के द्वारा सरकार को कई महत्वपूर्ण सुझाव समय-समय पर दिए जाते रहे. इस आयोग के अंतिम अध्यक्ष राज किशोर महतो बने जिनका कार्यकाल 13 नवंबर 2013 को समाप्त हो गया. उस वक्त से यह आयोग अध्यक्ष की आस में है, यानी विगत 13 वर्षों से समय-समय पर इसका कार्यकाल बढ़ता गया. मगर सरकार एक अध्यक्ष का मनोनयन नहीं कर पाई.
इस कार्यालय में अध्यक्ष के अलावे सचिव, सहायक, अध्यक्ष के निजी सचिव सहित कई पद सृजित हैं. जाहिर तौर पर यदि नये अध्यक्ष का मनोनयन हो जाता है तो यह सरकारी कार्यालय गुलजार हो जायेगा. इधर, राज्य विधि आयोग कार्यालय में रख-रखाव के अभाव में कानूनी किताबें खराब हो रही हैं. लाखों रुपये खर्च कर इन किताबों का संग्रह देश के विभिन्न राज्यों से तत्कालीन अध्यक्ष राज किशोर महतो के समय किया गया था.
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