भोपाल: पश्चिम बंगाल की राजनीति के बड़े चेहरे और टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें कानूनी तौर पर बढ़ गई हैं। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट पर लगी अंतरिम रोक को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। कोर्ट ने यह निर्णय तब लिया जब याचिकाकर्ता (अभिषेक बनर्जी) के वकील सुनवाई के दौरान अपनी याचिका के समर्थन में बहस करने के लिए उपस्थित नहीं हुए।
📜 क्या है पूरा मामला?
यह विवाद नवंबर 2020 का है। कोलकाता में एक राजनीतिक सभा के दौरान अभिषेक बनर्जी ने कैलाश विजयवर्गीय के पुत्र आकाश विजयवर्गीय के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया था। इस मामले में आकाश विजयवर्गीय ने भोपाल की एमपी/एमएलए (MP/MLA) कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके आधार पर कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था।
🚫 रोक क्यों हटाई गई?
अभिषेक बनर्जी ने पहले इस वारंट को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर 12 नवंबर 2025 को कोर्ट ने गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी थी। हालांकि, बुधवार को जब मामला सुनवाई के लिए आया, तो अभिषेक बनर्जी की ओर से पैरवी के लिए कोई उपस्थित नहीं हुआ। एकलपीठ ने इस उदासीनता को गंभीरता से लेते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि याचिकाकर्ता की अब इस मामले को आगे बढ़ाने में कोई रुचि नहीं है।
⚠️ अब क्या होगा?
हाई कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट पर लगी रोक को हटाते हुए याचिका को निरस्त कर दिया है। साथ ही, कोर्ट ने इस आदेश की प्रति भोपाल की विशेष न्यायालय (MP/MLA Court) को भेजने के निर्देश दिए हैं। अब इस आदेश के बाद भोपाल की निचली अदालत अभिषेक बनर्जी के खिलाफ आगे की कानूनी कार्यवाही करने के लिए स्वतंत्र है।
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