रांचीः झारखंड की पैरा थ्रो बॉल बालिका टीम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सीमाएं हौसले को रोक नहीं सकतीं. कड़े मुकाबलों और जबरदस्त संघर्ष के बीच झारखंड की दिव्यांग बालिका खिलाड़ियों ने पैरा थ्रो बॉल नेशनल फेडरेशन कप में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया है. यह प्रतियोगिता 3 फरवरी से 5 फरवरी 2026 तक आयोजित हुई, जिसमें देशभर की मजबूत टीमों ने हिस्सा लिया.
इस टूर्नामेंट के फाइनल मुकाबले में झारखंड की बालिका टीम का सामना राजस्थान से हुआ. मुकाबला बेहद रोमांचक रहा लेकिन झारखंड की खिलाड़ियों ने संयम, रणनीति और टीमवर्क का शानदार परिचय देते हुए राजस्थान को 21–17 से पराजित कर स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया. जैसे ही अंतिम अंक मिला, खिलाड़ियों की आंखों में खुशी के आंसू और चेहरे पर आत्मविश्वास की चमक साफ नजर आई.
वहीं पुरुष वर्ग में झारखंड की टीम ने भी दमदार खेल दिखाया. सेमीफाइनल मुकाबले में टीम को कड़ी टक्कर के बाद हार का सामना करना पड़ा और अंततः टीम को चौथे स्थान से संतोष करना पड़ा. हालांकि पदक से चूकने के बावजूद पुरुष टीम के प्रदर्शन को सराहनीय माना जा रहा है.
इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में झारखंड पुरुष टीम की ओर से कप्तान सनोज महतो के साथ मुकेश कंचन, पवन लकड़ा, चंदन लोहरा, मुकेश कुमार, अंगद कुमार, प्रमोद कुमार और राजेश कुमार मेहता ने भाग लिया. वहीं महिला वर्ग में कप्तान महिमा उरांव के नेतृत्व में अनीता तिर्की, प्रतिमा तिर्की, पुष्पा मिंज, संजुक्ता एक्का, असुंता टोप्पो, सरिता भूट कुमारी, सुनीता कुमारी, शकुंतला कुमारी, जयश्री कुमारी, पूनम कुमारी और तारामणि लकड़ा ने शानदार प्रदर्शन किया.
झारखंड की इस ऐतिहासिक जीत पर खेल प्रेमियों और खेल संगठनों में खुशी की लहर है. पैरा थ्रो बॉल से जुड़े पतरस तिर्की ने खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि झारखंड के इन प्रतिभाशाली दिव्यांग खिलाड़ियों को आर्थिक सहयोग की बेहद आवश्यकता है. उन्होंने सरकार से मांग की कि यदि खिलाड़ियों को नियमित आर्थिक सहायता और बेहतर सुविधाएं मिलें, तो वे भविष्य में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और भी बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं.
पैरा थ्रो बॉल एसोसिएशन ऑफ झारखंड की ओर से सरिता सिन्हा, राहुल मेहता, पतरस तिर्की और आनंद प्रसाद गोप ने भी सभी खिलाड़ियों को इस शानदार जीत के लिए हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा कि यह जीत सिर्फ एक पदक नहीं, बल्कि झारखंड के दिव्यांग खिलाड़ियों की मेहनत, आत्मविश्वास और अटूट संकल्प की पहचान है. पैरा थ्रो बॉल नेशनल फेडरेशन कप में झारखंड की बालिका टीम की यह जीत राज्य के खेल इतिहास में एक प्रेरणादायक अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है.
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