रायपुर: छत्तीसगढ़ की सियासत में आज उस वक्त बड़ा संदेश चला गया, जब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय राज्य कर्मचारी संघ छत्तीसगढ़ के आठवें प्रदेश अधिवेशन में पहुंचे. रोहनीपुरम में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में प्रदेश भर से हजारों शासकीय अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे. कार्यक्रम के मंच से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कर्मचारियों के हित में बड़ा फैसला लेते हुए ऐलान किया, कि अब छत्तीसगढ़ में भी केंद्र सरकार के समान महंगाई भत्ता (DA) दिया जाएगा.
55% से 58% हुआ महंगाई भत्ता, कर्मचारियों में खुशी की लहर
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अभी तक राज्य कर्मचारियों को 55% डीए मिल रहा था, जिसे अब 3% बढ़ाकर 58% कर दिया गया है. सीएम विष्णु देव साय ने कहा, “हम केंद्र से बस एक कदम पीछे थे, लेकिन अब वो दूरी भी खत्म कर दी गई है. अब छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों को भी केंद्र के समान महंगाई भत्ता मिलेगा.” सीएम की इस घोषणा के साथ ही पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा. कर्मचारियों ने एक दूसरे को गले लगाकर डीए बढ़ने की बधाई दी. कर्मचारी संगठन में शासन के इस फैसले से गदगद नजर आए.
पांच सूत्री मांगों पर बनेगी कमेटी, कर्मचारियों से सीधी बातचीत का भरोसा
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा, कर्मचारियों की ओर से पांच सूत्री मांगें आई हैं, जो पूरी तरह जायज हैं. इन मांगों को लेकर एक कमेटी बनाई जाएगी, कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकर चर्चा होगी और उसके बाद उन्हें पूरा किया जाएगा. इस बयान को सरकार की कर्मचारी-हितैषी नीति के तौर पर देखा जा रहा है.
“सरकार की योजनाओं की रीढ़ आप हैं”, कर्मचारियों की तारीफ में बोले साय
मुख्यमंत्री ने मंच से कर्मचारियों की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि “हमारी योजनाएं आप ही जमीन पर उतारते हैं, आप ही उनका लाभ जनता तक पहुंचाते हैं. सरकार और जनता के बीच सेतु आप हैं.” मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कर्मचारियों को सरकार की सबसे बड़ी ताकत बताया. सीएम ने कहा कि शासन आपके हित के लिए लगातार काम करती रहेगी.
राजनीतिक मायने: कर्मचारी वर्ग को साधने की बड़ी कोशिश
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि डीए बढ़ोतरी और मांगों पर कमेटी गठन का यह ऐलान आने वाले समय में कर्मचारी वर्ग को साधने का बड़ा दांव है, जिसका असर आने वाले समय सरकार के कामकाज पर भी दिख सकता है.
डीए से जुड़ी बड़ी बातें
डीए (डियरनेस अलाउंस) का मतलब महंगाई भत्ता होता है, जो सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बढ़ती महंगाई (जीवन-यापन की लागत) से निपटने में मदद करने के लिए उनके मूल वेतन (बेसिक सैलरी) के प्रतिशत के रूप में दिया जाने वाला एक भत्ता है, ताकि उनकी खरीदने की क्षमता बनी रहे और मुद्रास्फीति का असर कम हो सके, जिसकी गणना हर छह महीने में होती है और यह निवास स्थान के अनुसार अलग-अलग हो सकता है.
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