फीमेल टाइगर जया की भिलाई के मैत्री बाग में मौत

छत्तीसगढ़

दुर्ग: भिलाई के मैत्री बाग में फीमेल टाइगर जया की मौत हो गई. सुबह जब मैत्री बाग के कर्मचारियों ने पार्क का गेट खोला तो टाइगर के बाड़े के पास सन्नाटा मिला. कर्मचारियों को अनहोनी की आशंका हुई. जिसके बाद कर्मचारियों ने बाड़े के भीतर झांका तो देखा कि फीमेल टाइगर की बॉडी जमीन पर पड़ी है. बॉडी में किसी भी तरह की कोई हरकत नहीं मिली. बॉडी पर मक्खियां भी बैठी थी जिसके बाद मैत्री बाग के कर्मचारियों ने अपने आला अफसरों की इसकी खबर दी.

मैत्री बाग में बाघिन की मौत

मैत्री बाग के अफसरों ने भी मौके पर आकर देखा तो पाया कि बाघिन जया की मौत हो चुकी है. बाघिन का आज पोस्टमार्टम किया जाएगा. पीएम रिपोर्ट आने के बाद ये साफ हो पाएगा कि बाघिन की मौत की वजह क्या है. मैत्री बाग के कर्मचारियों ने बताया है कि बाघिन को कल रात खाना दिया गया था. बाघिन बीमार थी या नहीं इस बात का पता भी पीएम रिपोर्ट के आधार पर हो पाएगा.

बेस्ट टूरिस्ट डेस्टिनेशन में होती है गिनती

मैत्री बाग पर्यटकों का भिलाई में बेस्ट टूरिस्ट डेस्टिनेशन है. बड़ी संख्या में स्थानीय लोग यहां घूमने और पिकनिक मनाने आते हैं. मैत्री बाग में जानवरों को भी अच्छे से रखा जाता है. नए साल से पहले मैत्री बाग में बाघिन की मौत से स्थानीय पर्यटक भी दुखी हैं. दिसंबर से लेकर फरवरी तक बड़ी संख्या में पर्यटकों का यहां आना लगा रहता है.

तत्कालीन सोवियत संघ और भारत की दोस्ती का प्रतीक है पार्क

भिलाई का मैत्री बाग चिड़ियाघर जिसे दोस्ती का बगीचा भी कहा जाता है, दुर्ग के भिलाई में स्थित है. सोवियत संघ और भारत के बीच दोस्ती के प्रतीक के तौर पर इसे बनाया गया था. अभिवाजित मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ का ये सबसे बड़ा और पुराना चिड़ियाघर है.

नए साल पर यहां लगता है पर्यटकों का मेला

मैत्री बाग चिड़ियाघर में मुख्य आकर्षण का केंद्र सफेद बाघ और अलग अलग प्रजाती के पक्षी हैं. पार्क में झील, टॉय ट्रेन बच्चों के आकर्षण होते हैं. मैत्री बाग के कृत्रिम झील में द्वीप पर स्थित म्‍यूजिकल फाउटेंन देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग आते हैं. यहां संगीत की धुन पर पानी का फ्लो बढ़ता और घटता है. हर साल एक बार यहां फूलों की प्रदर्शनी भी आयोजित की जाती है.

सर्दी में अलाव और गर्मी में कूलर की होती है व्यवस्था

गर्मियों के मौसम में यहां जानवरों के लिए कूलर का भी बंदोबस्त किया जाता है. समय समय पर वेटनरी डॉक्टर यहां के जंगली जीवों का चेकअप भी करते रहते हैं. सर्दियों के मौसम में अलाव की व्यवस्था भी पार्क प्रबंधन की ओर से की जाती है. छत्तीसगढ़ में कुल 3 राष्ट्रीय उद्यान और 11 वन्यजीव अभयारण्य हैं. इसके साथ 4 बाघ अभयारण्य हैं.

छत्तीसगढ़ के प्रमुख वन्यजीव अभयारण्य

  • बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य (बलौदाबाजार)
  • तमोर पिंगला वन्यजीव अभयारण्य(सूरजपुर)
  • सीतानदी वन्यजीव अभयारण्य(धमतरी)
  • उदंती वन्यजीव अभयारण्य (गरियाबंद)
  • अचानकमार वन्यजीव अभयारण्य (मुंगेली)

बाघ अभयारण्य

  • गुरु घासीदास-तमोर पिंगला बाघ अभयारण्य
  • अचानकमार बाघ अभयारण्य
  • उदंती-सीतानदी बाघ अभयारण्य
  • इंद्रावती बाघ अभयारण्य

नेशनल पार्क

  • इंद्रावती नेशनल पार्क
  • गुरू घासीदास नेशनल पार्क
  • कांगेर घाटी राष्ट्रीय पार्क