छतौड़ा सीतामढ़ी धाम: भगवान राम के छत्तीसगढ़ प्रवास का महत्वपूर्ण स्थल, उपेक्षा का शिकार

मध्य प्रदेश

मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर: भरतपुर ब्लॉक के छतौड़ा गांव में सीतामढ़ी धाम स्थित है. यह एक प्राचीन और पवित्र स्थल है. सीतामढ़ी धाम भरतपुर से 45 किलोमीटर दूर स्थित है. सीतामढ़ी धाम की प्राकृतिक सुंदरता अद्वितीय है. चारों ओर से पहाड़ियों से घिरा हुआ यह स्थल प्रकृति की गोद में स्थित है. यहां की हरियाली और शांति मन को शांति प्रदान करती है.

सीतामढ़ी धाम ऐसे पहुंचे: छतौड़ा आश्रम तक पहुंचने के लिए मनेन्द्रगढ़ मुख्यालय से कठौतिया होते हुए जनकपुर से कोटाडोल मार्ग से कमर्जी मार्ग पर बढ़ना होगा. जनकपुर से करीब 45 किलोमीटर की दूरी पर छतौड़ा ग्राम स्थित है. सड़क किनारे छतौड़ा आश्रम का बोर्ड भी लगा दिया गया है.

राम वन गमन पथ छत्तीसगढ़: सीतामढ़ी धाम की धार्मिक महत्ता बहुत अधिक है. यह स्थल भगवान राम के छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान एक महत्वपूर्ण स्थल रहा है. पुरातत्व विभाग के नोडल अधिकारी डॉ. विनोद पांडे ने बताया कि भगवान राम ने सीतामढ़ी में कुछ दिन रुककर भगवान शिव की पूजा की थी और सीता माता ने भी वहां पूजा की थी.

ग्रामीणों का आरोप: सीतामढ़ी धाम स्थानीय लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. वे इस धाम को अपनी आस्था और श्रद्धा का केंद्र मानते हैं. स्थानीय लोगों की भावनाएं सीतामढ़ी धाम से जुड़ी हुई हैं.

ग्राम छतौड़ा के निवासी शिवनारायण मौर्य ने बताया कि सीतामढ़ी धाम में शासन के द्वारा आज तक कोई निर्माण कार्य नहीं कराया गया है. उन्होंने कहा कि यह राम वन गमन पथ का सबसे प्रथम स्थान है और छत्तीसगढ़ में सर्वप्रथम भगवान राम आकर यहां पर ठहरे थे.

सीतामढ़ी धाम में सौंदर्यीकरण के लिए कदम उठाए जाएं. इससे यहां का विकास हो सकेगा और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा. बड़े बड़े नेता यहां आए हैं और सीतामढ़ी धाम के विकास की बात कही है, लेकिन आज तक किसी ने ध्यान नहीं दिया-शिवनारायण मौर्य,स्थानीय निवासी

श्रद्धालुओं के लिए भी इंतजाम नहीं: ग्रामीण पवन कुमार ने कहा कि श्रद्धालुओं के बैठने की भी कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे उन्हें पूजा-पाठ करने में दिक्कत होती है.

कई बार नेताओं से सीतामढ़ी धाम की व्यवस्था सुधारने की मांग की है, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. सीतामढ़ी धाम उपेक्षा का शिकार हो रहा है और शासन को इस पर ध्यान देना चाहिए-पवन कुमार, स्थानीय

सीतामढ़ी धाम में श्रद्धालुओं के लिए कोई सुविधा नहीं है. वहां न तो शेड है, न चबूतरा है और न ही आने जाने के लिए ठीक से रास्ता है-भरतलाल, स्थानीय निवासी

गांव में कई समस्याएं: मंदिर के पुजारी जवाहर लाल ने बताया कि उनके गांव में कई समस्याएं हैं. गांव में एक पुराना मंदिर है, जो लगभग सात पीढ़ी पुराना है. मंदिर की देखभाल गांव वाले ही करते हैं. प्रशासन से कोई मदद नहीं मिलती है.

सीतामढ़ी में कई पुरातात्विक अवशेष मिले हैं. जिला प्रशासन के प्रयास से रायपुर के पुरातत्व विभाग की टीम ने हाल ही में सीतामढ़ी का निरीक्षण किया है और डॉक्यूमेंटेशन किया है. भविष्य में सीतामढ़ी के विकास के लिए कई योजनाएं बनाई जा रही हैं. पुरातत्व विभाग की टीम द्वारा किए गए डॉक्यूमेंटेशन के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और स्थानीय लोगों को सूचित किया जाएगा.

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