जालंधर की हवा हुई जहरीली, हाईकोर्ट की चेतावनी भी बेअसर, जानें क्या है पूरा मामला

पंजाब

जालंधर: पंजाब में लगातार बढ़ता प्रदूषण अब विकराल रूप ले चुका है। जालंधर शहर, जो एक समय उद्योगों के लिए जाना जाता था, आज प्रदूषण की राजधानी में तब्दील होता जा रहा है। हालात यह हैं कि यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) खतरनाक स्तर को पार कर चुका है और सांस लेना तक मुश्किल होता जा रहा है।

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि कई उद्योग बिना पर्यावरणीय मंजूरी, नियम-क़ानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए निरंतर धुआं और कचरा उगल रहे हैं। कपूरथला रोड, सर्जिकल कॉम्प्लेक्स और नहर के किनारे स्थित कई फैक्ट्रियां– खासकर रबड़ और कार्बन युक्त उत्पाद बनाने वाली– शहर के बीचोंबीच नियमों को तोड़ती हुई प्रदूषण फैला रही हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इन फैक्ट्रियों से उठने वाला जहरीला काला धुआं सुबह से रात तक उनके घरों में घुस जाता है, जिससे बच्चों और बुजुर्गों में श्वसन रोग, एलर्जी, त्वचा संक्रमण जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं।

हाईकोर्ट ने दी थी चेतावनी, फिर भी हालात जस के तस

यह कोई पहला मौका नहीं है जब प्रदूषण को लेकर सवाल उठे हों। इससे पहले जालंधर के लैदर कॉम्प्लेक्स में चल रही टेनरियों द्वारा प्रदूषण फैलाने पर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए 61 फैक्ट्रियों को बंद करने के आदेश दिए थे। टेनरियों से निकलने वाला काला पानी ‘काला संघियान’ जलधारा को प्रदूषित कर रहा था, जिससे न सिर्फ जलस्रोत दूषित हुआ, बल्कि आस-पास की आबादी भी प्रभावित हुई।

नियमों की अनदेखी – प्रशासन की चुप्पी

विभाग जिम्मेदारी स्थिति
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड उद्योगों की निगरानी निष्क्रिय
नगर निगम क्षेत्रीय स्वीकृति / सफाई चुप
इंडस्ट्री विभाग लाइसेंसिंग / निरीक्षण कोई कार्यवाही नहीं
पुलिस सार्वजनिक सुरक्षा शिकायतों पर ध्यान नहीं

जल प्रदूषण भी बना गंभीर संकट

रात के अंधेरे में कई फैक्ट्रियां अपना वेस्ट पानी और रासायनिक कचरा सीधे नहरों में बहा रही हैं। इससे न सिर्फ जलीय जीवन संकट में है, बल्कि आस-पास के लोग भी इस पानी का उपयोग करने से बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। इसके बावजूद पर्यावरण विभाग और प्रशासन ने अभी तक इन उद्योगों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।

बिना लाइसेंस चल रही फैक्ट्रियां

नाम न छापने की शर्त पर एक स्थानीय नागरिक ने बताया कि उसने आर.टी.आई. के माध्यम से पिछले दो वर्षों में इन उद्योगों की जांच रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन उसे कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। कई फैक्ट्रियों के पास वैध लाइसेंस तक नहीं हैं, फिर भी वे खुलेआम उत्पादन कर रहे हैं और धड़ल्ले से वातावरण को प्रदूषित कर रहे हैं।

प्रशासनिक उदासीनता और उद्योग विभाग की चुप्पी

स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभाग और फैक्ट्री मालिकों के बीच समझौता है, जिससे जांच एजेंसियां मूकदर्शक बनी हुई हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, इंडस्ट्री डिपार्टमेंट, नगर निगम और पुलिस–सभी को इन मामलों की जानकारी होने के बावजूद कोई कार्यवाही नहीं हो रही। यह विभागीय मिलीभगत और प्रशासनिक लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण है।

स्थानीय निवासियों की अपील

थक चुके नागरिकों ने अब पंजाब सरकार और राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एन.जी.टी.) से गुहार लगाई है कि वह इस गंभीर मामले में हस्तक्षेप करें। लोगों की मांग है कि बड़े स्तर पर फैक्ट्रियों की जांच कराई जाए, बिना लाइसेंस और नियमों का उल्लंघन करने वाले उद्योगों पर सख्त कार्रवाई हो और उन्हें पर्यावरणीय सुरक्षा के दायरे में लाया जाए।

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