बाटला हाउस में बुलडोजर चलेगा या नहीं? ये है वो स्कीम जिसके आधार पर राहत मिलने का किया जा रहा दावा

दिल्ली

दिल्ली का बाटला हाउस इस समय सुर्खियों में बना हुआ है. बाटला हाउस में कई घरों पर बुलडोजर चलने का खतरा मंडरा रहा है. इसी बीच सरकार की एक स्कीम के बल पर राहत मिलने का दावा किया जा रहा है. यह स्कीम है पीएम-उदय स्कीम. यह स्कीम क्या है और किस तरह से राहत दे सकती है. चलिए इन सभी सवालों का जवाब जानते हैं.

बाटला हाउस में मुरादी रोड और खिजर बाबा कॉलोनी में कई मकानों में रेड क्रॉस का निशान लगा दिया गया है और नोटिस चिपका दिया गया है. लोगों के बीच चिंता और डर पैदा हो गया है कि कहीं उनके आशियाने टूट न जाए. दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) और उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ने यह नोटिस लगाया है. जिसमें 11 जून की शुरुआत में विध्वंस की चेतावनी दी गई है.

SC जुलाई में करेगा सुनवाई

दिल्ली के ओखला गांव में अवैध ढांचे गिराने के प्रस्ताव संबंधी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अगले महीने जुलाई में सुनवाई करेगा. बेंच ने कहा कि अनधिकृत संरचनाओं को गिराए जाने के प्रस्ताव के खिलाफ दायर याचिका पर कोर्ट जुलाई में सुनवाई करेगा. डीडीए के अधिकार क्षेत्र के तहत मुरादी रोड के किनारे खसरा संख्या 279 में 2.8 बीघा (0.702 हेक्टेयर) भूमि और खिजर बाबा कॉलोनी में खसरा संख्या 277 में 4.5 बीघा (1.12 हेक्टेयर) भूमि पर अनधिकृत मकानों पर रेड क्रॉस लगाया गया है, जिस पर यूपी सिंचाई विभाग का दावा है.

कैसे राहत बनेगी स्कीम?

डीडीए के नोटिस में प्रधानमंत्री – दिल्ली आवास अधिकार योजना (पीएम-उदय) में अनधिकृत कॉलोनियों के तहत आने वाले घरों को बख्शा गया है. इस स्कीम में जिन मकानों ने रजिस्टर किया है उन्हें छोड़ दिया गया है और बख्शा गया है. यह ही पॉइंट है जो बाटला हाउस के लोगों के लिए राहत की बात है. कह सकते हैं एक ऐसी उम्मीद जिससे वो अपने आवास को बचा सकते हैं.

ओखला के विधायक अमानतुल्लाह खान ने भी सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के जुलाई में इस मामले पर सुनवाई करने के लिए कहने के बाद इस योजना का जिक्र किया. उन्होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट से आज हमें यह राहत मिली है कि जुलाई के पहले हफ्ते में जब कोर्ट खुलेगा उसके अंदर यह मामला सुना जाएगा. साथ ही विधायक ने कहा, जितने भी लोग हैं जिनके ऊपर खतरा मंडरा रहा था उन से कहा गया कि वो पीएम-उदय योजना में राहत ले सकते हैं और अपनी तरफ से पीएम उदय में एप्लीकेशन डाल दें और जिस तरह से पीएम उदय में दूसरे लोग कवर हो रहे हैं ऐसे ही इन लोगों को भी अपनी एप्लीकेशन देनी है.

क्या है पीएम-उदय स्कीम?

अब पीएम-उदय स्कीम राहत बन सकती है यह जानने के बाद, स्कीम को जानना और समझना जरूरी है कि आखिर यह स्कीम क्या है और क्यों दावा किया जा रहा है कि यह रिलीफ दे सकती है. दरअसल, इस स्कीम के तहत दिल्ली में अवैध कॉलोनियों को लेकर कदम उठाया गया था. मोदी सरकार ने साल 2019 में अवैध कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को मालिकाना हक देने के लिए PM-UDAY Scheme की शुरुआत की थी. इस योजना के जरिए इन कॉलोनी में रहने वाले रजिस्टर कर अपनी प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री करा सकते हैं और मालिकाना हक ले सकते हैं. दिल्ली में 1731 अनधिकृत कॉलोनी हैं.

इन कॉलोनियों में घर के मालिकों को मालिकाना हक देने के लिए इस योजना की शुरुआत 29 अक्टूबर, 2019 में केंद्र सरकार ने की थी. इस योजना का मकसद दिल्ली में अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले करीब 40 लाख लोगों को DDA के जरिए उनके मकान का मालिकाना हक देना है. अब बाटला हाउस के लोगों से इसी स्कीम में आवेदन करने के लिए कहा जा रहा है.

कैसे करें रजिस्टर?

इस योजना के लिए आप ऑनलाइन रजिस्टर करा सकते हैं. रजिस्ट्रेशन के लिए आपको pmuday.ncog.gov.in/login या DDA की वेबसाइट www.dda.gov.in पर जाना होगा. DDA की वेबसाइट पर आपको PM-Uday Cell Tab पर क्लिक करना होगा. इसके बाद ‘Registration’ पर क्लिक करेंगे तो रजिस्ट्रेशन फॉर्म आपकी स्क्रीन पर आ जाएगा. इसी के बाद जो-जो दस्तावेज आपसे आपकी प्रॉपर्टी के मांगे जाए वो देने होंगे.

कौन-कौन से दस्तावेज चाहिए?

  1. सेल डीड/गिफ्ट डीड/ पॉवर ऑफ अटॉर्नी
  2. जनवरी 2015 से पहले निर्माण के प्रूफ
  3. Stamp Paper पर Indemnity Bond 1 & 2
  4. सेल्फ डिक्लरेशन
  5. संपत्ति मालिक और प्रॉपर्टी की फोटो
  6. पावर ऑफ अर्टानी या एग्रीमेंट टू सेल की पिछली पूरी चेन
  7. पेमेंट की रसीद और पजेशन के प्रूफ
  8. बिजली का बिल
  9. प्लेन पेपर पर आवेदक के हस्ताक्षर
  10. पैन कार्ड और आधार कार्ड

इसी के साथ जहां बाटला हाउस के लोगों पर यह खतरा मंडरा रहा है. इसी बीच विधायक अमानतुल्लाह खान ने कहा, कि यह बस्ती पिछले 40 सालों से है और अब अनधिकृत रूप से नियमित कर दी गई है. डीडीए ने गलत तरीके से पिक एंड चूज का तरीका अपनाया है और गलत रिपोर्ट दी है. इसी के बाद अब कानूनी लड़ाई पीएम-उदय पात्रता और संपत्ति अधिकार मान्यता अधिनियम, 2019 के दावों पर टिकी हुई है. निवासियों का कहना है कि वो पिछले कई सालों से यहां रह रहे हैं और बिजली के बिल से लेकर टैक्स दे रहे हैं.

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