मध्य प्रदेश के सागर शहर में यातायात व्यवस्था को सुधारने और स्वच्छता बनाए रखने के उद्देश्य से नगर निगम द्वारा भोपाल रोड पर बनाए गए डेयरी प्रोजेक्ट पर अब प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है। निगम द्वारा बनाए गए इस प्रोजेक्ट में कुल 155 डेयरी संचालकों को प्लॉट आवंटित किए गए थे, लेकिन बार-बार निर्देश देने के बावजूद संचालकों ने अपनी डेयरियां वहां शिफ्ट नहीं की। आखिरकार नगर निगम ने कड़ा रुख अपनाते हुए तय समय-सीमा में शेड का निर्माण कर डेयरी संचालित न करने वाले 105 डेयरी संचालकों के प्लॉट निरस्त कर दिए हैं और उनकी जमा राशि को भी राजसात कर लिया है।
📋 अंतिम नोटिस के बाद भी नहीं सुधरा रवैया, सिर्फ 13 संचालकों के जवाब मिले संतोषजनक
रतौना-हफसिली डेयरी विस्थापन प्रोजेक्ट के तहत आवंटित इन प्लॉटों पर 15 दिन के भीतर शेड बनाकर डेयरी शुरू करनी थी। शर्तों का पालन न करने पर नगर निगम ने 17 अगस्त 2026 को अंतिम नोटिस जारी कर 7 दिन के भीतर जवाब और निर्माण कार्य पूरा करने को कहा था। निगम को कुल 118 डेयरी संचालकों की पावती मिली, जिसमें से केवल 46 लोगों ने अपने जवाब प्रस्तुत किए। इनमें से भी मात्र 13 डेयरी संचालकों के जवाब ही संतोषजनक पाए गए, जबकि शेष 33 के जवाब असंतोषजनक रहे। नियमों की लगातार अनदेखी के चलते 105 संचालकों के खिलाफ यह बड़ी कार्रवाई महापौर परिषद के निर्णय के आधार पर की गई है।
🧹 शहर को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाने के लिए जारी रहेगी सख्त कार्रवाई: आयुक्त राजकुमार खत्री
नगर निगम आयुक्त राजकुमार खत्री ने इस मामले पर स्पष्ट किया है कि डेयरी विस्थापन परियोजना का मुख्य उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में पशुपालन से होने वाली गंदगी, जाम और अन्य समस्याओं को कम करना तथा सागर को एक स्वच्छ शहर बनाना है। उन्होंने दोटूक कहा कि आवंटित प्लॉट पर निर्धारित शर्तों के अनुसार डेयरी का संचालन शुरू करना अनिवार्य है। निगम द्वारा शहरहित में इस प्रकार की विस्थापन परियोजनाओं के नियमों का कड़ाई से पालन कराना आगे भी जारी रहेगा, ताकि आम नागरिकों को सुगम यातायात और साफ-सुथरा वातावरण मिल सके।
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