Badrinath NH 58 Blocked: 66 सालों से सिरोबगड़ बना नासूर, क्या कभी मिलेगा इस हाईवे को स्थायी समाधान?

उत्तराखण्ड

उत्तराखंड में पहाड़ों पर हो रही मूसलाधार बारिश के बीच ऋषिकेश-बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग-58 (NH-58) पर स्थित सिरोबगड़ एक बार फिर यात्रियों के लिए काल बन गया है। लगातार हो रही बारिश के कारण पहाड़ी से भारी-भरकम बोल्डर और मलबे गिरने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सिरोबगड़ के पास पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा टूटकर सड़क पर आ गिरा है, जिससे मुख्य मार्ग पूरी तरह से अवरुद्ध हो गया है। सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरें और वीडियो इस बात की गवाही दे रहे हैं कि यात्री किस कदर जान जोखिम में डालकर यात्रा करने को मजबूर हैं।

⏳ 66 साल पुराना ‘नासूर’: सिस्टम की सुस्ती की पोल

एक तरफ जहां देश ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘विकसित भारत’ का दावा कर रहा है, वहीं NH-58 का यह हिस्सा सिस्टम की सुस्ती की पोल खोल रहा है। सिरोबगड़ का यह डरावना रूप आज का नहीं है। साल 1960 से ही यह हिस्सा लगातार दरक रहा है। आज वर्ष 2026 आ चुका है, लेकिन 66 साल बीत जाने के बाद भी कोई सरकार या विभाग इस नासूर का स्थायी इलाज ढूंढने में नाकाम रहा है। मौसम चाहे गर्मी का हो या बरसात का, यहाँ पहाड़ से पत्थरों का गिरना एक आम बात बन चुकी है।

🚗 हाईवे पर लगा 5 किलोमीटर लंबा जाम, यात्री बेहाल

ताजा भूस्खलन के बाद बद्रीनाथ हाईवे पर अफरा-तफरी मच गई है। पहाड़ टूटने की वजह से रुद्रप्रयाग और सिरोबगड़ के बीच दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं। हाईवे पर करीब 5 किलोमीटर लंबा भीषण जाम लगा है, जिसमें सैकड़ों यात्री, महिलाएं और बच्चे फंसे हुए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, प्रशासन जब मलबे को हटाता भी है, तो कुछ ही मिनटों में दोबारा पत्थर गिरने लगते हैं, जिससे रास्ता फिर बंद हो जाता है।

📢 ट्रैफिक पुलिस की अपील: वैकल्पिक रास्तों का करें इस्तेमाल

हालात को देखते हुए रुद्रप्रयाग ट्रैफिक पुलिस और स्थानीय प्रशासन एक्शन मोड में है। पुलिसकर्मी लाउडस्पीकर के जरिए लगातार मुनादी कर रहे हैं। यात्रियों से अपील की जा रही है कि जब तक मलबा हटाने का काम पूरा नहीं हो जाता और मार्ग सुरक्षित नहीं हो जाता, तब तक वे जान जोखिम में न डालें और डायवर्ट किए गए वैकल्पिक रास्तों का उपयोग करें।

❓ सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहे गंभीर सवाल

इस भूस्खलन ने एक बार फिर ‘चारधाम यात्रा’ मार्ग की सुरक्षा और पहाड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर के दावों पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सरकारों और लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली से नाराज स्थानीय जनता का कहना है कि दशकों में समाधान निकालने के बजाय सिर्फ समस्याएं बढ़ाई गई हैं। जनता हर साल टैक्स देती है, लेकिन सफर के नाम पर उन्हें सिर्फ मौत का डर और घंटों का जाम ही नसीब हो रहा है।

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry