उत्तराखंड में चारधाम यात्रा अपने शबाब पर है. पिछले महीने एक महीने से शुरू हुई इस चारधाम यात्रा में अब तक लाखों श्रद्धालुओं ने बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री आदि तीर्थस्थलों पर जाकर दर्शन पूजन किए हैं. अक्सर कथा कहानियों में सुनने को मिलता है कि जो बड़े भाग्यशाली होते हैं, वहीं चारधाम यात्रा के बाद जिंदा अपने घर लौटते हैं. यही वजह है कि सनातन धर्म में आम तौर पर सभी जिम्मेदारियों के निर्वहन के बाद चारधाम यात्रा की परंपरा रही है. अब बड़ा सवाल यह है कि चारधाम यात्रा के दौरान किसी की मौत हो जाए तो उसका शव परिवार तक पहुंचता है कि नहीं, यदि पहुंचता है तो कैसे और इसमें आने वाला खर्च कौन वहन करता है?
इसके साथ ही एक सवाल के साथ एक और सवाल कि ऐसा होने पर श्रद्धालु के परिजनों को कोई क्षतिपूर्ति भी मिलती है क्या? चूंकि इस साल चारधाम यात्रा शुरू होने के बाद इसी एक महीने के अंदर 73 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है. इसलिए ये सवाल लाजमी भी हैं. आइए, इस प्रसंग में हम इन्हीं सवालों के जवाब ढूंढने और जानने की कोशिश करते हैं. शुरूआत शुरू से ही करते हैं. उत्तराखंड सरकार चारधाम यात्रा के लिए जाने वाले सभी श्रद्धालुओं और पर्यटकों का रजिस्ट्रेशन करती है. इस दौरान सभी को दुर्घटना बीमा का विकल्प दिया जाता है. जो यात्री इस विकल्प को चुनते हैं, वह एक लाख के बीमे से कवर हो जाते हैं और यात्रा के दौरान मौत होने पर उनके परिवार को एक लाख रुपये का दुर्घटना क्लेम मिल जाता है.
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