Crude Oil Price Drop: कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट, 40 दिनों में 28% सस्ती; जानें आपके शहर में पेट्रोल-डीजल के दाम

विदेश

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में पिछले कुछ हफ्तों से लगातार गिरावट का दौर जारी है। पिछले 40 दिनों में क्रूड ऑयल करीब 28 फीसदी सस्ता हो चुका है। शुक्रवार को ब्रेंट फ्यूचर्स 71.74 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड 68.60 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता नजर आया। विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट से तेल की सप्लाई सुचारू होने और रणनीतिक भंडार से तेल निकाले जाने के कारण कीमतों पर दबाव बना हुआ है।

🤝 यूएस-ईरान के बीच सकारात्मक वार्ता

मिडिएटर कतर ने जानकारी दी है कि अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी शांति समझौते की दिशा में ‘सकारात्मक प्रगति’ हुई है। इस वार्ता का मुख्य उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट से तेल की शिपिंग को बाधा मुक्त बनाए रखना है। दोनों पक्षों के बीच अगली बैठक ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद होने की संभावना है। होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते ही दुनिया का 20 फीसदी तेल टैंकरों के जरिए भेजा जाता है, इसलिए इस क्षेत्र में शांति का सीधा असर कीमतों में स्थिरता के रूप में दिख रहा है।

भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर

कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में आई गिरावट का असर फिलहाल भारत में खुदरा पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर नहीं पड़ा है। देश में ईंधन के दाम 25 मई, 2026 के बाद से ‘फ्रीज’ हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर नरमी के बावजूद कंपनियां अभी कीमतों में कटौती के बजाय स्थिरता बनाए रखने को प्राथमिकता दे रही हैं।

3 जुलाई, 2026 को प्रमुख महानगरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें (प्रति लीटर):

शहर पेट्रोल (₹) डीजल (₹)
दिल्ली 102.12 95.20
मुंबई 111.21 97.83
कोलकाता 113.51 99.82
चेन्नई 108.01 99.66
हैदराबाद 115.73 103.82
बेंगलुरु 110.89 98.80

🔮 भविष्य के संकेत और बाजार का अनुमान

यूबीएस (UBS) और एचएसबीसी (HSBC) जैसी वित्तीय संस्थाओं ने ब्रेंट क्रूड के लिए अपने मूल्य अनुमानों में कटौती की है। तीसरी और चौथी तिमाही के लिए अनुमानों को घटाकर 80 डॉलर प्रति बैरल किया गया है। दूसरी ओर, नाइजीरिया का ओपेक (OPEC) और आईईए (IEA) के साथ गहराता संबंध ऊर्जा बाजार में नए संतुलन की ओर इशारा कर रहा है। हालांकि, रूस की रिफाइनरियों पर हमले जैसी भू-राजनीतिक घटनाएं बाजार में उतार-चढ़ाव पैदा कर सकती हैं, लेकिन कुल मिलाकर फिलहाल आपूर्ति की स्थिति सुधरती हुई दिख रही है।

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