लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी के अलीगंज इलाके में सोमवार को हुए एक हृदयविदारक अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। उषा मेहता मार्ग स्थित एक तीन मंजिला इमारत में दोपहर करीब 3 बजे अचानक लगी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया। इस हादसे में 15 लोगों की दुखद मौत हो गई, जबकि 9 अन्य गंभीर रूप से घायल हैं।
💨 धुआं बना मौत का असली कारण
मंत्री ए.के. शर्मा और स्थानीय विधायक नीरज बोरा के अनुसार, इस हादसे में अधिकांश मौतें झुलसने से नहीं, बल्कि दम घुटने से हुईं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आग पहली मंजिल पर स्थित एक एसी (AC) डक्ट से शुरू हुई थी। इमारत में वेंटिलेशन और आपातकालीन निकास (Emergency Exit) की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण जहरीला धुआं पूरी बिल्डिंग में भर गया, जिससे अंदर मौजूद छात्रों और कर्मचारियों को संभलने का मौका ही नहीं मिला।
🏢 बिल्डिंग में चल रहे थे कई व्यवसाय
यह इमारत एक घनी और व्यावसायिक गतिविधियों वाली जगह थी:
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बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर: पेट शॉप और क्लीनिक।
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दूसरी मंजिल: लर्निंग स्पेस (लाइब्रेरी) और कोचिंग सेंटर।
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अन्य: हेड हॉपर स्टूडियो (एनिमेशन और 3D आर्ट प्रोडक्शन)। हादसे के वक्त लाइब्रेरी और कोचिंग में मौजूद छात्र सबसे अधिक प्रभावित हुए।
⚖️ सख्त कार्रवाई और SIT का गठन
हादसे की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एसआईटी (SIT) का गठन किया है। प्रशासनिक स्तर पर बड़ी कार्रवाई करते हुए बिजली विभाग, अग्निशमन विभाग और लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। वहीं, पुलिस ने इमारत के मालिकों समेत कुल चार लोगों को गिरफ्तार किया है। मृतकों के परिजनों को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री राहत कोष से आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है।
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