जबलपुर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भोपाल में मेफेड्रोन ड्रग्स निर्माण और अंतरराष्ट्रीय तस्करी से जुड़े एक बड़े मामले में शामिल तीन आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह मामला केवल नशीले पदार्थ की बरामदगी तक सीमित नहीं, बल्कि यह एक सुनियोजित और पदानुक्रमित अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क है, जिसने समाज की जड़ों पर प्रहार किया है।
🧪 कैसे पकड़ा गया ड्रग्स का यह जाल?
डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) ने 16 अगस्त 2025 को भोपाल के जगदीशपुर में दबिश देकर 61.20 किलोग्राम लिक्विड मेफेड्रोन बरामद किया था। इस सिंडिकेट का मास्टरमाइंड सलीम डोला (फरार) था, जिसने रसायनों की खरीद से लेकर निर्माण तक पूरी चेन बना रखी थी। केस में शामिल व्यापारी महफूज खान, वेरेन और अंजलि ने अपनी फर्मों और हवाला के जरिए इस अवैध कारोबार को वित्तपोषित (Finance) किया था।
🚨 ड्रग्स नेटवर्क की कार्यप्रणाली
जांच में सामने आया कि आरोपी टेक्सटाइल और हार्डवेयर कारोबार के नाम पर खतरनाक रसायनों (जैसे हाइड्रोक्लोरिक एसिड, मिथाइल डाइक्लोराइड) की अवैध खरीद करते थे।
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हवाला का उपयोग: अंजलि नामक महिला हवाला के जरिए नकद लेनदेन संभालती थी।
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वैज्ञानिक साक्ष्य: गांधीनगर स्थित नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट में मेफेड्रोन और कच्चे माल के रूप में ‘2-ब्रोमो 4-मिथाइल प्रोपियोफेनोन’ की पुष्टि हुई है।
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डिजिटल सबूत: आरोपियों के मोबाइल कॉल रिकॉर्ड और व्हाट्सएप चैट से उनके बीच आपसी समन्वय और गहरी साजिश के ठोस प्रमाण मिले हैं।
🏛️ अदालत की सख्त टिप्पणी
हाईकोर्ट ने जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि आरोपियों की भूमिका पूरी सप्लाई चेन में एक अहम कड़ी की तरह है। कोर्ट ने कहा, “ड्रग तस्करी और नशीली दवाओं का निर्माण बहुत गंभीर अपराध है। ये न केवल वर्तमान कानून व्यवस्था को चुनौती देते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी बर्बाद कर देते हैं।” इस संगठित सिंडिकेट के सभी सदस्य अपनी जिम्मेदारी को अच्छी तरह समझते थे, इसलिए वे राहत पाने के पात्र नहीं हैं।
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