नई दिल्ली: ग्लोबल टेक्नोलॉजी जगत में भारत की बढ़ती साख का एक बड़ा उदाहरण ‘जोहो’ (Zoho) है। हाल ही में जोहो के फाउंडर श्रीधर वेम्बू ने खुलासा किया कि उनकी कंपनी पिछले 25 वर्षों से चीन में मजबूती से अपना कारोबार कर रही है। माइक्रोसॉफ्ट और सेल्सफोर्स जैसी दिग्गज ग्लोबल कंपनियों की मौजूदगी के बावजूद, जोहो ने चीनी बाजार में अपनी एक अलग पहचान बनाई है।
💼 चीन में जोहो का मजबूत आधार
श्रीधर वेम्बू के अनुसार, जोहो चीन में अपने कई कार्यालयों के जरिए 300 से अधिक लोगों को रोजगार दे रही है। कंपनी की सफलता का मुख्य आधार ‘लोकलाइज़ेशन’ (स्थानीय जरूरतों के अनुसार सॉफ्टवेयर में बदलाव) रहा है। चीन में कंपनी अपने एंटरप्राइज आईटी मैनेजमेंट डिवीजन ‘मैनेजइंजन’ (ManageEngine) के जरिए सक्रिय है। डेटा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जोहो ने चीन में दो समर्पित डेटा सेंटर स्थापित किए हैं, जो विशेष रूप से वहां के ग्राहकों का डेटा होस्ट करते हैं।
📈 2026 में 100 मिलियन युआन का निवेश
जोहो चीन के बाजार में अपनी पकड़ और मजबूत करने के लिए तैयार है। ‘चाइना डेली’ की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी 2026 में चीन में 100 मिलियन युआन (लगभग 14.5 मिलियन डॉलर) से अधिक का बड़ा निवेश करने की योजना बना रही है। यह निवेश मुख्य रूप से:
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डेटा सेंटर्स और हार्डवेयर के विस्तार में।
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स्थानीय रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) टीमों को मजबूत करने में।
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मार्केटिंग और पार्टनरशिप को बढ़ाने में किया जाएगा।
🧩 प्रतिस्पर्धा के बीच खुद को साबित करना
चीन जैसे अत्यधिक प्रतिस्पर्धी बाजार में, जहाँ पहले से ही कई घरेलू और वैश्विक सॉफ्टवेयर वेंडर मौजूद हैं, जोहो का 25 साल तक टिके रहना और निरंतर ग्रोथ हासिल करना एक बड़ी उपलब्धि है। कंपनी ने क्षेत्रीय बुनियादी ढांचे और स्थानीय साझेदारियों पर विशेष ध्यान देकर चीनी व्यवसायों की जटिल जरूरतों को पूरा किया है, जिससे आज वह वहां की आईटी मैनेजमेंट इंडस्ट्री में एक भरोसेमंद नाम बन गई है।
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