बिलासपुर: न्यायधानी के सिम्स (CIMS) अस्पताल में रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञों ने एक जटिल मामले को सुलझाते हुए 24 वर्षीय युवती को जीवनदान दिया है। गोंडपारा की रहने वाली यह युवती पिछले एक साल से बार-बार बुखार, कमजोरी और रात में पसीने आने की समस्या से परेशान थी। निजी और जिला अस्पतालों में इलाज के बावजूद बीमारी की वजह स्पष्ट नहीं हो पा रही थी, लेकिन सिम्स में उन्नत तकनीक के जरिए टीबी (TB) की पहचान कर उसका सफल इलाज किया गया।
🔍 ब्रांकोस्कोपी से खुला बीमारी का राज
12 जून 2026 को युवती सिम्स की ओपीडी में पहुंची, जहां डॉ. प्रतीक कुमार और उनकी टीम ने मामले को गंभीरता से लिया। शुरुआती एक्स-रे और सीटी स्कैन में निमोनिया के लक्षण दिखे, लेकिन बलगम की जांच रिपोर्ट निगेटिव आई। इसके बाद डॉक्टरों ने ‘ब्रांकोस्कोपी’ (दूरबीन आधारित जांच) करने का निर्णय लिया। फेफड़ों के प्रभावित हिस्सों से लिए गए नमूनों की सीबीनाट (CBNAAT) जांच कराई गई, जिसमें टीबी की पुष्टि हुई। रिपोर्ट आते ही तुरंत इलाज शुरू किया गया, जिससे युवती की हालत में तेजी से सुधार हुआ।
🩺 डॉक्टरों की सलाह: लक्षणों को न करें नजरअंदाज
सिम्स अस्पताल के डीन डॉ. रमणेश मूर्ति ने बताया कि टीबी आज भी देश में एक बड़ी जनस्वास्थ्य चुनौती है। कई बार यह सामान्य बुखार के रूप में सामने आती है और प्रारंभिक जांचों में पकड़ में नहीं आती। ऐसी स्थिति में ब्रांकोस्कोपी जैसी उन्नत जांचें जीवनरक्षक साबित होती हैं।
⚠️ टीबी के मुख्य लक्षण और बचाव
मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. लखन सिंह ने आमजन को सचेत करते हुए कहा कि निम्नलिखित लक्षणों को भूलकर भी नजरअंदाज न करें:
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लंबे समय तक रहने वाला बुखार।
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अत्यधिक कमजोरी और वजन का कम होना।
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लगातार खांसी या रात में पसीना आना। ऐसी समस्या होने पर तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करें और अपना इलाज शुरू कराएं। समय पर इलाज ही टीबी को हराने का एकमात्र तरीका है।
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