भोपाल में मानवता की एक अद्भुत मिसाल देखने को मिली है, जहाँ एक परिवार ने दुख की घड़ी में भी धैर्य रखते हुए अंगदान का बड़ा फैसला लिया। 42 वर्षीय सजना एस.ए. को गंभीर ब्रेन हैमरेज के बाद अस्पताल में ब्रेन स्टेम डेड घोषित कर दिया गया था। परिजनों की सहमति के बाद, अस्पताल की ट्रांसप्लांट टीम ने सफलतापूर्वक लिवर और किडनी ट्रांसप्लांट कर दो गंभीर मरीजों को नया जीवन प्रदान किया।
🏥 अंगदान का कठिन और नेक निर्णय
केरल की मूल निवासी सजना एस.ए. को 15 मई 2026 को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कठिन परिस्थितियों के बावजूद, उनके परिवार ने अंगदान के माध्यम से दूसरों के जीवन को बचाने का निर्णय लिया। यह पूरी प्रक्रिया नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन (NOTTO) और स्थानीय अधिकृत समिति के दिशा-निर्देशों के तहत पूरी तरह सुरक्षित तरीके से संपन्न हुई।
🎖️ राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई
अंगदान जैसे महान कार्य को नमन करते हुए, पुलिस बल द्वारा दिवंगत सजना एस.ए. के पार्थिव शरीर को ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ (राजकीय सम्मान) दिया गया। अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ ने भी परिजनों के इस फैसले का सम्मान करते हुए उन्हें सम्मानित किया। अंतिम विदाई के समय वहां मौजूद लोगों ने फूल बरसाकर सजना एस.ए. के प्रति अपनी कृतज्ञता और श्रद्धा व्यक्त की।
📢 अंगदान के प्रति जागरूकता जरूरी
चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि अंगदान न केवल एक जीवन को बचाता है, बल्कि यह मृत्यु के बाद भी व्यक्ति को दूसरों के माध्यम से जीवित रखता है। भोपाल में हुई यह घटना समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की अपील करती है। परिजनों का यह साहसिक कदम न केवल मानवता की सेवा है, बल्कि समाज में आपसी सौहार्द और परोपकार की एक नई मिसाल भी है।
संपादकीय टिप्पणी: अंगदान एक जीवनरक्षक उपहार है। इस महान कार्य के बारे में अधिक से अधिक लोगों को जागरूक करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। क्या आप अंगदान के इस संकल्प से प्रेरित हुए? अपनी राय साझा करें।
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