रांचीः झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा से भोजपुरी, मगही और अंगिका को हटाए जाने से उठे विवाद को शांत करने के लिए हेमंत सरकार ने बड़ा कदम उठाया है.
इसके तहत राज्य सरकार ने झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा नियमावली में विभिन्न जिलों के लिए निर्धारित भाषा संबंधी मामलों पर विचार/अध्ययन करने के पश्चात नियमावली में जनजातीय/ क्षेत्रीय भाषा को सम्मिलित या विलोपित करने के बिंदु पर अनुशंसा करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर के नेतृत्व में बनाने का फैसला किया है.
कार्मिक प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग के द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार इस कमेटी में श्रम मंत्री संजय प्रसाद यादव, ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडे सिंह, पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद और नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री सुदिव्य कुमार को शामिल किया गया है.
इस अधिसूचना के अनुसार समिति की बैठकों के लिए स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग को नोडल की जिम्मेदारी दी गई है. सरकार के उप सचिव ब्रज माधव के हस्ताक्षर से जारी अधिसूचना के अनुसार समिति यथाशीघ्र अपना प्रतिवेदन राज्य सरकार को समर्पित करेगी.
झारखंड मैथिली भाषा संघर्ष समिति ने किया स्वागत
झारखंड मैथिली भाषा संघर्ष समिति ने इसका स्वागत किया है. मैथिली भाषा संघर्ष समिति के प्रदेश संयोजक अमरनाथ झा ने कहा कि सरकार द्वारा गठित समिति के समक्ष हमलोग मांग रखेंगे. संघर्ष समिति का स्पष्ट रुप से मानना है कि झारखंड में द्वितीय राजभाषा में मान्य सभी भाषाओं को शिक्षक पात्रता परीक्षा में मान्यता मिलनी चाहिए, इससे किसी भी भाषा के साथ अन्याय नहीं होगा. उन्होंने कहा कि मैथिली भाषा-भाषी झारखंड के प्रत्येक जिले में रहते हैं जिनकी संख्या लाखों में है ऐसे में हम सरकार के समक्ष समिति के माध्यम से जोरदार ढंग से तथ्यों के साथ बातों को रखेंगे.
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