IT Stocks falling: शानदार नतीजों के बाद भी क्यों गिर रहे IT कंपनियों के शेयर? निवेशकों के लिए आई बड़ी खबर

व्यापार

देश में आईटी कंपनियों के तिमाही नतीजों का सिलसिला शुरू हो गया है. देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो आदि कंपनियों के तिमाही नतीजे अच्छे देखने को नहीं मिले हैं. वहीं दूसरी ओर एचसीएल टेक के ने नतीजों ने थोड़ा निराश किया है. जिसकी वजह से कंपनी के शेयरों में बुधवार को गिरावट भी देखने को मिली. अगर ओवरऑल देखा जाए तो आईटी कंपनियों का प्रदर्शन बेकार नहीं रहा है. उसके बाद भी निफ्टी आईटी इंडेक्स में बीते 4 कारोबारी दिनों में 4 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखने को मिल चुकी है.

वैसे इसके पीछे कुछ और कारण भी बताए जा रहे हैं. जानकारों मानना है कि आने वाले दिनों में आईटी कंपनियों की ग्रोथ के धीमा रहने का अनुमान है. वहीं दूसरी ओर पिछले साल की तरह इस साल भी देश की आईटी कंपनियों पर एआई का खतरा मंडराता हुआ दिखाई दे रहा है. भारत की आईटी कंपनियों के सबसे बड़े क्लाइंट अमेरिका है. लेकिन जिस तरह की मौजूदा स्थिति है, अमेरिका की स्थिति भी डांवाडोल होती हुई दिखाई दे रही है. जिसकी वजह से वहां की कंपनियां अपने खर्च में कटौती कर सकती है.

वहीं दूसरी ओर बीते कुछ हफ्तों में आईटी कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिली है. जिसकी वजह से निवेशकों ने प्रॉफिट बुकिंग करना भी शुरू कर दिया है. वहीं दूसरी ओर विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर भी आईटी शेयरों में साफ देखने को नहीं मिल रहा है. आइए आंकड़ों के साथ इन बातों को समझने की कोशिश करते हैं.

आईटी कंपनियों के तिमाही नतीजे

  1. टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में अपने कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट में 12.22 फीसदी (साल दर साल) की बढ़ोतरी दर्ज की, जो पिछले साल की इसी अवधि के 12,224 करोड़ रुपए के मुकाबले बढ़कर 13,718 करोड़ हो गया. वहीं, तिमाही दर तिमाही के हिसाब से TCS का नेट प्रॉफिट लगभग 29 फीसदी का इजाफा देखने को मिला है.
  2. मार्च तिमाही में विप्रो का नेट प्रॉफिट तिमाही आधार पर 12.3 फीसदी बढ़कर 3,502 करोड़ रुपए हो गया. वैसे रेवेन्यू 2.4 बिलियन डॉलर देखने को मिला, जो बाजार के 2.6 बिलियन डॉलर के अनुमान से कम है. विप्रो की आईटी सर्विसेज से कमाई 2.65 बिलियन डॉलर रही. इसमें तिमाही आधार पर 0.6 फीसदी और सालाना आधार पर 2.1 फीसदी की बढ़त हुई.
  3. वहीं बात एचसीएल टेक की करें तो वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में नेट प्रॉफिट 4.2 प्रतिशत बढ़कर 4,488 करोड़ रुपए देखने को मिला. पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 4,307 करोड़ रुपए देखने को मिला था.
  4. देश की बड़ी आईटी कंपनियों में शुमार इंफोसिस के तिमाही नतीजे गुरुवार 23 अप्रैल को आएंगे. जानकारों का अनुमान है कि इंफोसिस के रेवेन्यू में तिमाही-दर-तिमाही आधार पर 0.2 फीसदी से 0.7 फीसदी तक की गिरावट देखने को मिल सकती है.

आईटी कंपनियों के शेयरों का प्रदर्शन?

  1. देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टीसीएस के शेयरों में बीते 5 कारोबारी दिनों में करीब 2 फीसदी की गिरावट देखने को मिल चुकी है. जबकि बीते एक महीने में कंपनी के शेयर में 6 फीसदी का इजाफा देखने को मिल चुका है.
  2. बीते 5 कारोबारी दिनों में एचसीएल टेक के शेयरों में करीब 12 फीसदी की गिरावट देखने को मिल चुकी है. जबकि एक महीने में ये गिरावट 5 फीसदी की देखी जा रही है. वैसे बुधवार को ही कंपनी के शेयर करीब 11 फीसदी टूट चुके थे.
  3. देश की बड़ी आईटी कंपनियों में शुमार इंफोसिस के शेयरों में बीते 5 कारोबारी दिनों में 4 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है. जबकि बीते एक महीने में ये तेजी मात्र 1 फीसदी की रह गई है.
  4. अगर बात विप्रो की बात करें तो बीते 5 कारोबारी दिनों की करें तो कंपनी के शेयरों में 3.64 फीसदी की गिरावट आ चुकी है. जबकि बीते एक महीने में करीब 9 फीसदी का इजाफा देखने को मिल चुका है.
  5. निफ्टी आईटी इंडेक्स में 16 अप्रैल के बाद से 4 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखने को मिल चुकी है. जबकि एक महीने में निफ्टी आईटी में 9 फीसदी से ज्यादा की तेजी देखने को मिल चुकी है.

क्यों आ रही आईटी शेयरों में गिरावट?

  1. कमजोर भविष्य का अनुमान: कंपनियों ने नतीजों में मुनाफा तो अच्छा दिखाया, लेकिन आगे की विकास दर (Growth) धीमी रहने का अनुमान दिया है, जिससे निवेशक निराश हैं. यही वजह है कि निवेशकों की ओर से आईटी शेयरों पर से भरोसा कम होता दिखाई दे रहा है.
  2. AI का खतरा: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से आईटी कंपनियों के पारंपरिक बिजनेस मॉडल पर खतरा मंडरा रहा है, जिससे रेवेन्यू कम होने की चिंता है. पिछले साल भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला था. अमेरिका, कोरिया, जापान जैसी देशों की एआई कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला था.
  3. अमेरिका में आर्थिक अनिश्चितता: भारतीय आईटी कंपनियां अमेरिकी क्लाइंट्स पर निर्भर हैं, और यूएस में टैरिफ व मंदी की आशंकाओं के कारण क्लाइंट्स खर्च कम कर रहे हैं. जिसका असर कंपनियों के रेवेन्यू और मुनाफे पर भी देखने को मिल सकता है. वहीं दूसरी ओर डॉलर में गिरावट और ट्रंप की पॉलिसी का असर भी देखने को मिल सकता है.
  4. प्रॉफिट बुकिंग: जैसा कि हमने आपको बताया कि बीते एक महीने में आईटी कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिली है. आईटी इंडेक्स में 9 फीसदी से ज्यादा का उछाल देखने को मिला है. जिसकी वजह से निवेशक मुनाफे की वसूली कर रहे हैं, जिससे शेयरों में बिकवाली का दबाव देखने को मिल रहा है.
  5. विदेशी निवेशकों की मुनाफावसूली: निफ्टी आईटी इंडेक्स में कमजोरी और एफआईआई (FII) का बाहर निकलना भी दबाव का कारण बना हुआ है. आंकड़ों को देखें तो बाकी सेक्टर्स के मुकाबले कम ही सही, लेकिन विदेशी निवेशकों ने आईटी शेयरों से अपनी होल्डिंग कम की है. अप्रैल के पहले पखवाड़े में एफआईआई ने आईटी शेयरों से 1,325 करोड़ रुपए निकाल लिए हैं.

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