जालंधर (पंजाब): पनबस (PUNBUS) एवं पी.आर.टी.सी. (PRTC) ठेका कर्मचारी यूनियन से जुड़े कर्मचारियों ने रविवार मध्यरात्रि 12 बजे से राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है।
इसके परिणामस्वरूप 3, 4 और 5 अगस्त को पूरे पंजाब में सरकारी बसों का चक्का पूरी तरह जाम रहेगा। इस अवधि में यूनियन द्वारा राज्यभर के बस अड्डों और डिपुओं पर बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन एवं रोष धरने आयोजित किए जाएंगे।
💬 “समाधान नहीं मिला तो होगी आर-पार की लड़ाई”: यूनियन प्रदेश महासचिव शमशेर सिंह ढिल्लों की चेतावनी
यूनियन के प्रदेश महासचिव शमशेर सिंह ढिल्लों ने जानकारी देते हुए बताया कि सोमवार को राज्य सरकार एवं विभागीय अधिकारियों के साथ आयोजित होने वाली उच्च स्तरीय बैठक में यूनियन अपने लंबित मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगी।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी जायज मांगों का स्थायी समाधान नहीं निकाला, तो यूनियन आर-पार की आर-पार लड़ाई लड़ने के लिए बाध्य होगी।
🚌 केवल पक्के कर्मचारी चलाएंगे बसें, डिपुओं में पर्याप्त स्टाफ न होने से यात्री बेहाल
ठेका कर्मचारियों की इस तीन दिवसीय हड़ताल के दौरान केवल नियमित (पक्के) कर्मचारी ही बस सेवाओं का संचालन करेंगे।
वर्तमान में प्रत्येक डिपो में नियमित कर्मचारियों की संख्या नाममात्र ही बची है, जिसके कारण पूरे पंजाब राज्य में 100 बसों का सुचारू परिचालन होना भी अत्यंत कठिन दिख रहा है। इसके चलते लंबी दूरी व अंतरराज्यीय मार्गों पर यात्रा करने वाले यात्रियों को भारी परेशानियों व दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। रविवार देर शाम पंजाब से बाहर जाने वाली बसों का परिचालन न होने से सैकड़ों यात्रियों को निराश होकर वापस लौटना पड़ा।
🪧 बस अड्डों और डिपुओं के बाहर जारी रहेगा रोष प्रदर्शन, उपेक्षा का आरोप
डिपो-2 के प्रधान सतपाल सिंह सत्ता तथा डिपो-1 के प्रतिनिधि चानण सिंह ने बताया कि हड़ताल की अवधि के दौरान सभी डिपुओं और बस अड्डों के मुख्य द्वारों पर शांतिपूर्ण रोष धरने दिए जाएंगे।
यूनियन नेताओं ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही मांगों को लेकर कतई गंभीर दिखाई नहीं दे रही है, जिसके विरोध में उन्हें यह कठोर कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा है।
💼 कर्मचारियों को पक्का करने और आउटसोर्स ठेकेदारी प्रथा समाप्त करने की मुख्य मांग
यूनियन नेताओं ने कहा कि संविदा (ठेका) कर्मचारियों को नियमित करने की मांग को सरकार द्वारा लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त, आउटसोर्सिंग व्यवस्था के तहत बिचौलियों/ठेकेदारों को बाहर निकालकर कर्मचारियों से सीधे विभाग द्वारा सेवाएं लेने के प्रति कोई ठोस नीति नहीं बनाई जा रही है। विभाग द्वारा ठेकेदारों को भारी भरकम धनराशि और टैक्स अदा किया जा रहा है, जबकि सीधे अनुबंध से विभाग करोड़ों रुपये की राजस्व बचत कर सकता है।
🛑 ‘किलोमीटर स्कीम’ और निजीकरण की नीतियों का कड़ा विरोध
इसके साथ ही, परिवहन विभाग में ‘किलोमीटर स्कीम’ के तहत निजी बसों को शामिल करने की योजना का तीव्र विरोध जताते हुए यूनियन पदाधिकारियों ने कहा कि, “यह प्रत्यक्ष रूप से सार्वजनिक परिवहन के निजीकरण को बढ़ावा देने का प्रयास है। कर्मचारी इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे और अपना आंदोलन जारी रखेंगे।”
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