डी.सी. कार्यालय में उस समय एक अनोखा मामला सामने आया, जब दलित महिला फरियादी ने शिकायत-पत्र देकर आत्महत्या की मंजूरी मांगी। सीमा पुत्री बलविंदर सिंह निवासी रनीया ने पत्रकारों को बताया कि बीते 3 महीने पूर्व उसने छहर्टा के निजी अस्पताल में एक बच्चे को जन्म दिया था, जिसे बच्चा चोर गिरोह ने चोरी कर उसे बेच दिया। पीड़िता ने बताया कि उसने पुलिस कमिश्नर को कई बार लिखती शिकायत कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, जबकि पुलिस न तो आज तक उसका बच्चा दिलवा सकी और न ही बच्चा चोर गिरोह के खिलाफ कार्रवाई कर सकी।
उसने बताया कि उल्टा बच्चा चोर गिरोह के लोगो द्वारा उसे जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। पीड़िता ने बताया कि वह भारतीय वाल्मीकि आदि धर्म समाज के जिला प्रधान रवि गिल की मौजूदगी में डी.सी कार्यालय में शिकायत लेकर पहुंची है और डी.सी की अनुपस्थिति में उसने डी.सी कार्यालय में अपनी शिकायत दर्ज करवा दी है।
महिला ने जिला प्रशासन को चेताया हैं कि अगर 27 जनवरी तक उसका बच्चा उसे नहीं मिला तो वह पुलिस कमिश्नर कार्यालय के बाहर आत्महत्या करने को मजबूर होगी, जिसकी जिम्मेदारी जिला पुलिस के साथ-साथ बच्चा चोर गिरोह के सदस्यों की होगी। रवि गिल ने कहा कि पीड़िता अनुसूचित जाति वर्ग से संबंधित है, जिस कारण उसके मामले को अनदेखा किया जा रहा है। अगर यह मामला किसी अमीर घराने का होता इस वक्त हल हो जाता। उन्होंने कहा कि बच्चा चोर गिरोह पर अमृतसर पुलिस प्रशासन मेहरबान क्यों है?
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