कांकेर जंगलवार कॉलेज: जहां नक्सलियों से लड़ने जवानों को मिलती है ट्रेनिंग, वहां निशुल्क प्रशिक्षण से 17 युवा पुलिस भर्ती में चयनित

छत्तीसगढ़

कांकेर: जंगलवार कॉलेज, जहां नक्सलियों से लड़ने के लिए जवानों को ट्रेनिंग दी जाती थी वहां अब स्थानीय गरीब बच्चों को निशुल्क भर्ती प्रकिया की ट्रेनिंग दी जा रही है. यहां से प्रशिक्षण लेने वाले 17 युवाओं का चयन पुलिस आरक्षक और अन्य भर्ती परीक्षा में हुआ है. ये वह युवा है जिनके पास भर्ती परीक्षा की तैयारी करने के लिए ग्राउंड और संसाधन नहीं थे. जिन्हें जंगलवार कॉलेज ने भर्ती में होने वाली हर प्रक्रिया की बखूबी ट्रेनिंग देकर दक्ष किया.

संस्थान में तीसरा विशेष अभियान: जंगलवार कॉलेज के DSP अमर सिंह कुर्रे ने बताया कि यह संस्थान में चलाया जा रहा तीसरा विशेष अभियान है. पहले अभियान के तहत, ट्रेनिंग लेने के बाद 22 अभ्यर्थी बस्तर फाइटर के रूप में चयनित हुए. इसके बाद दो ट्रेनिंग लेने वाले अभ्यर्थियों का चयन सब-इंस्पेक्टर के पद पर भी हुआ, जिनके नाम दीप्ति कुर्रे और लक्ष्मी मरकाम हैं.

हाल ही में हुई भर्ती में ग्रामीण क्षेत्रों के कुल 17 बच्चों का चयन जिला बल आरक्षक और नगर सेना के रूप में हुआ है.– अमर सिंह कुर्रे, DSP जंगलवार कॉलेज

चयनित अभ्यर्थी का अनुभव: जंगलवार कॉलेज से निशुल्क ट्रेंनिग लेकर आरक्षक पद पर चयन हुए यशांशु प्रयाग ने बताया कि पहले वे गांव में तैयारी करते थे, जहां उनके पास न तो अच्छा ग्राउंड था और न ही कोई सही मार्गदर्शन देने वाला. उन्हें दौड़ने की तकनीक और समय के बारे में कोई जानकारी नहीं थी.

मुझे​ अपने भाई के माध्यम से पता चला कि जंगलवार में निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है. मैं प्रजापति सर, प्रीतम सर और पासवान सर का विशेष धन्यवाद देता हूं. इन प्रशिक्षकों ने दौड़ने की सही तकनीक सिखाई, साथ ही पीटी और कई व्यायाम कराए-यशांशु प्रयाग, चयनित युवा

अभ्यर्थी का एक साथ 3 जिलों में हुआ चयन: यशांशु ने आगे बताया कि सही ट्रेनिंग मिलने से उनकी दौड़ने की गति और जंप में काफी सुधार हुआ और उनका आत्मविश्वास बढ़ा. यशांशु का चयन तीन जिलों में आरक्षक के पद पर हुआ था, लेकिन उन्होंने कोंडागांव जिले को चुना है.

ट्रेनिंग के दिखने लगे परिणाम: जंगलवार कॉलेज के ट्रेनर ने बताया कि बहुत से युवा भर्ती प्रक्रिया में होने वाली तमाम प्रक्रियाओं से अनजान होते हैं. कई युवाओं के पास ग्राउंड और बाकी संसाधनों की कमी होती है. इसके कारण वह पीछे रह जाते हैं. उन्हें हर तरीके की निशुल्क ट्रेनिंग दी जा रही है. आज उसका परिणाम भी देखने को मिला है.

अधिकारियों का कहना है कि आगामी समय में होने वाली अन्य भर्ती परीक्षाओं की भी ट्रेनिंग दी जाएगी. ताकि स्थानीय युवाओं किसी भी तरह से पीछे न रहे.

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