उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में लग रहे महाकुंभ-2025 का नजारा इस बार कुछ बदला बदला नजर आएगा. इस बार बिजली पानी से लेकर ट्रांसपोर्ट व अन्य सभी सेवाओं को बेहतर बनाने की कोशिश की गई है. खासतौर पर मेले में प्रवास करने वाले कल्पवासियों, साधु संतों और यहां आने वाले तीर्थ यात्रियों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए बड़ा प्रोजेक्ट शुरू किया गया है. इस प्रोजेक्ट के तहत मेला परिसर में 1249 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई गई है.इस पाइप लाइन से 56000 कनेक्शनों के जरिए मेला क्षेत्र में 24 घंटे जलापूर्ति होगी.
यह प्रोजेक्ट लगभग पूरा हो चुका है. केवल फाइनल टच देना बाकी है तो उसे भी 30 नवंबर तक पूरा कर लिया जाएगा. बता दें कि महाकुंभ 2025 के लिए संगम क्षेत्र में अस्थाई महाकुंभ नगरी बसने लगी है. कुंभ प्रशासन की ओर से साधु संतों, अखाड़ों और कल्पवासियों के लिए जमीन का आवंटन कर दिया है. इस बार जमीनों का आवंटन भी इस प्रकार से किया गया है, जैसे किसी आधुनिक शहर को बसाया जा रहा हो. इसके लिए कुंभ नगरी में छोटी छोटी कॉलोनियां और इन कॉलोनियों में पहुंचने के लिए रास्ता, पानी और बिजली की सुविधा दी गई है.
56000 कनेक्शन से होगी जलापूर्ति
इसी क्रम में मेला क्षेत्र में जलापूर्ति के लिए उत्तर प्रदेश जल निगम ने 1249 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई है. इस पाइपलाइन से 56 हजार कनेक्शन दिए जाएंगे. जल निगम के अधिशासी अभियंता अमित राज के मुताबिक यह पाइपलाइन 25 सेक्टर और 4000 हेक्टेयर में फैले पूरे मेला क्षेत्र को कवर करती है. इसमें परेड ग्राउंड से लेकर संगम क्षेत्र और फाफामऊ से लेकर अरैल एवं झूंसी तक का इलाका शामिल है. दरअसल इस बार मेला क्षेत्र पहले की अपेक्षा काफी बड़ा है.
डबल एरिया में बस रही है कुंभ नगरी
पूर्व में माघमेला या कुंभ मेला के लिए जितना एरिया कवर होता था, उससे कहीं डबल एरिया में इस बार कुंभ नगरी बस रही है. ऐसे में पूरे मेला क्षेत्र को कवर करने और सभी को स्वच्छ पेयजल की सुविधा देने के लिए 1249 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन का जाल बिछाया गया है. एक्सईएन अमित राज के मुताबिक करीब 40 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट को पूरा कर लिया गया है. बस फाइनल टच दिया जा रहा है और इसे भी हर हाल में 30 नवंबर तक पूरा कर लिया जाएगा. उन्होंने बताया कि इस पाइपलाइन में जलापूर्ति के लिए 85 नलकूप और 30 जनरेटर भी लगाए जा रहे हैं.
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