12 घंटे की ड्यूटी और महिलाओं की नाइट शिफ्ट, गुजरात सरकार ने फैक्ट्री एक्ट में किया संशोधन… जानें क्या-क्या बदला

गुजरात

गुजरात सरकार ने फैक्ट्री एक्ट में संशोधन किया है. इस संशोधन के बाद से ही 9 घंटे की ड्यूटी के घंटे को बढ़ा दिया गया है. इसको 12 घंटे कर दिया गया है. इसी के साथ महिलाओं के लिए नाइट शिफ्ट भी शुरू की गई है. अब महिलाएं भी शाम 7 बजे से सुबह 6 बजे तक काम नाइट शिफ्ट करेंगी. गुजरात सरकार ने फैक्टरी अधिनियम, 1948 में संशोधन किया है.

राज्य सरकार के श्रम, कौशल विकास और रोजगार विभाग ने 1 जुलाई को अध्यादेश जारी किया. अध्यादेश में कहा गया है कि फैक्ट्री की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने, निवेश को बढ़ाने और रोजगार पैदा करने के लिए कारखानों को छूट देने के लिए लागू किया गया है.

12 घंटे की करनी होगी ड्यूटी

संशोधन में यह किया गया है कि कर्मचारियों की ड्यूटी के अधिकतम समय को 9 घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे कर दिया गया है. लेकिन इसी के साथ यह भी जोड़ा गया है कि पूरे हफ्ते में कर्मचारियों को 48 घंटे ही काम करना होगा. अधिकतम काम करने का समय 12 घंटे कर दिया गया है. इसका मतलब है कि अब कर्मचारियों को पूरे हफ्ते में 48 घंटे काम करना होगा. अगर कोई कर्मचारी हफ्ते में 4 दिन 12 घंटे की ड्यूटी करता है तो उसका 48 घंटे काम करने की सीमा पूरी हो जाएगी.

साथ ही इसमें बढ़े हुए कार्य घंटों के लिए काम करने के लिए कर्मचारी की लिखित सहमति की जरूरत होगी. इसी के साथ कर्मचारियों को अब बिना ब्रेक के 5 से 6 घंटे काम करना होगा.

ओवरटाइम में किया गया बदलाव

इसी के साथ ओवरटाइम की लीमिट को बढ़ाकर 75 घंटों से 125 घंटे किया गया है. हालांकि, इसके लिए कर्मचारियों की लिखित इजाजत लेना जरूरी होगा.

महिलाओं के लिए नाइट शिफ्ट

इसी के साथ महिला कर्मचारियों के लिए काफी बड़ा संशोधन किया गया है. महिला कर्मचारियों को अब नाइट शिफ्ट करने की इजाजत दी गई है. गुजरात सरकार ने महिलाओं को शाम 7 बजे से सुबह 6 बजे तक नाइट शिफ्ट करने की अनुमति दी है. लेकिन इसके लिए उनकी सुरक्षा को लेकर कुछ शर्तों का पूरा होना जरूरी है.

इसके लिए यह देखना जरूरी होगा कि अगर वो नाइट शिफ्ट कर रही है तो फैक्ट्री में उनकी सुरक्षा का पूरा इंतजाम हो. जैसे यौन उत्पीड़न के कृत्यों को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए गए हो. काम, छुट्टी, स्वास्थ्य और स्वच्छता के संबंध में उन्हें उचित कामकाजी परिस्थितियां देना. साथ ही शर्तों में यह भी कहा गया है कि न सिर्फ कारखाने के अंदर, बल्कि कारखाने के आसपास और बाहर भी रोशनी हो, ज्यादा अंधेरा न हो , साथ ही सीसीटीवी कवरेज हो. साथ ही नाइट शिफ्ट में महिला श्रमिक 10 से कम के बैच में नहीं हों. साथ ही उनको परिवहन सुविधा दी जाए.

हालांकि, यह बात भी साफ की गई है कि किसी भी महिला के लिए नाइट शिफ्ट करना अनिवार्य नहीं होगा और जो महिलाएं नाइट शिफ्ट में काम करने में रुचि रखती हैं, उनसे लिखित सहमति ली जाएगी.

क्या होंगी शर्तें?

  1. कर्मचारियों के साथ यौन उत्पीड़न या किसी भी तरह के कृत्य को रोकने के लिए कदम उठाए गए हो
  2. यह सुनिश्चित किया जाए कि फैक्ट्री में महिलाओं को छुट्टी दी जाए, स्वास्थ्य और स्वच्छता के संबंध में उचित कामकाजी परिस्थितियां हो.
  3. उनकी शिकायत सुनने के लिए प्रावधान हो.
  4. फैक्ट्री के आसपास और बाहर लाइट हो, सीसीटीवी कैमरा हो
  5. 5-साथ ही नाइट शिफ्ट में महिला श्रमिक 10 से कम के बैच में नहीं हों.
  6. 6- सुरक्षा के इंतजाम हो, महिला गार्ड हो
  7. 7- परिवहन की सुविधा हो, रूट का सावधानीपूर्वक चयन इस तरह किया जाए कि किसी भी महिला कर्मचारी का पहले न पिकअप किया जाए और न ही सबसे बाद में ड्रोप किया जाए.

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