विनोबा भावे विश्वविद्यालय में संपन्न हुआ 10वां दीक्षांत समारोह, विद्यार्थियों में दिखी खुशी, कहा- अब राष्ट्र निर्माण के लिए होगा काम

झारखण्ड

हजारीबाग: विनोबा भावे विश्वविद्यालय में 10वां दीक्षांत समारोह धूमधाम से मनाया गया. कार्यक्रम विश्वविद्यालय परिसर स्थित विवेकानंद सभागार में आयोजित किया गया. मुख्य अतिथि एवं कुलाधिपति और राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने छात्रों को उपाधियां प्रदान कीं. इस दौरान एक डी-लिट, विभिन्न विषयों में 230 पीएचडी, स्नातकोत्तर टॉपरों को 94, बेस्ट ग्रेजुएट को एक तथा वोकेशनल टॉपरों को 21 उपाधियां दी गईं. कुल 347 उपाधियां वितरित की गईं. सभी टॉपरों को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया.

छात्र-छात्राओं में दिखा उत्साह

दीक्षांत समारोह में छात्र-छात्राओं में काफी उत्साह देखने को मिला. सैकड़ों छात्र-छात्राएं एवं उनके अभिभावक विश्वविद्यालय परिसर में मौजूद रहे. भारतीय परिधान में सजे छात्र एवं शिक्षकगण कार्यक्रम में उपस्थित रहे. उपाधि प्राप्त करने वाले छात्रों ने कहा कि अथक परिश्रम और मेहनत से ही स्वर्ण पदक मिलता है. राज्यपाल के हाथों उपाधि मिलने से उत्साह और बढ़ जाता है. उन्होंने कहा कि निस्संदेह आने वाले समय में वे राज्य एवं राष्ट्र की सेवा में महत्वपूर्ण योगदान देंगे. शिक्षा मनुष्य को सामाजिक प्राणी बनाती है और सभी के लिए आवश्यक है.

राज्यपाल का संबोधन: शिक्षा केवल आजीविका नहीं, कर्तव्यनिष्ठ नागरिक बनाने का माध्यम

राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की तथा उनके कर्तव्यों की याद दिलाई. उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल उपाधि प्राप्त करने का आयोजन नहीं है, बल्कि डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के परिश्रम, अनुशासन, धैर्य और साधना का प्रतीक है. यह विश्वविद्यालय के लिए बड़ा दिन है.उन्होंने आगे कहा कि सभी को इमानदारी और लगन से पढ़ाई करने की आवश्यकता है. छात्रों को अपनी जिम्मेदारी उठानी होगी, तभी देश विकास के पथ पर आगे बढ़ेगा. शिक्षा का उद्देश्य केवल आजीविका अर्जित करना नहीं, बल्कि संवेदनशील, जिम्मेवार और कर्तव्यनिष्ठ नागरिक का निर्माण करना है. देश ऐसे युवाओं की ओर आशाभरी दृष्टि से देख रहा है, जो चुनौतियों से घबराते नहीं, बल्कि उन्हें अवसर में बदल देते हैं.

कुलाधिपति ने छात्रों से अपेक्षा जताई कि वे शिक्षा के महत्व को अपने तक सीमित न रखें. समाज के प्रति उनका बड़ा दायित्व है.

कुलपति ने उठाया स्टाफ की कमी का मुद्दा

विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. चंद्रभूषण शर्मा ने कहा कि छात्र जीवन में दीक्षांत का बेहद महत्वपूर्ण स्थान है. छात्रों को देश के प्रति सजग रहकर सेवा करने की आवश्यकता है. देश हित में अपना करियर बनाएं तथा जीवन को सरल रखें, ताकि कभी परेशानी न हो.

कुलपति ने कुलाधिपति से विश्वविद्यालय की समस्याओं की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि शिक्षकों एवं कर्मियों की घोर कमी है. तृतीय वर्ग के 506 सृजित पदों के विरुद्ध मात्र 110 तथा चतुर्थ वर्ग के 387 सृजित पदों में केवल 110 कर्मी कार्यरत हैं. उन्होंने विश्वविद्यालय के विकास कार्यों, पढ़ाई तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी.

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