हेमा मालिनी की फिल्म सीता और गीता सन् 1972 में धूम मचा चुकी थी. रमेश सिप्पी निर्देशित और सलीम-जावेद की लिखी उस फिल्म में डबल रोल में हेमा मालिनी के दो रूप थे. एक बहुत ही शांत और दूसरी बहुत ही चंचल. डायरेक्टर रमेश सिप्पी ने उसी चंचल किरदार को आगे चलकर शोले में बसंती के तौर पर उभारा जबकि गुलज़ार ने अपनी फिल्म खुशबू में शांत किरदार का एक अलग ही रूप दिया. सन् 1975 की उसी फिल्म खुशबू के अब पचास साल पूरे हो गए हैं.
आमतौर पर जब सन् 1975 की फिल्मों पर बातें होती हैं तब शोले की चर्चा छिड़ती है और शोले में भी गब्बर सिंह और बसंती की चर्चा सबसे ज्यादा होती है लेकिन बहुत कम ही लोगों को मालूम है कि हेमा मालिनी ने शोले और खुशबू की शूटिंग साथ-साथ की थी. खुशबू मई में ही रिलीज हो गई थी जबकि सेंसर बोर्ड की कुछ अड़चनों के चलते शोले अगस्त में रिलीज हो सकी.
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