आज हम आपको लेकर चलते हैं उस अद्भुत साधना की ओर, जहां एक मूर्तिकार ने सिर्फ पत्थर नहीं तराशा, बल्कि श्रद्धा, भक्ति और तप से प्रभु श्रीराम को प्रतिमा में जीवंत कर दिया. जी हां, हम बात कर रहे हैं अयोध्या में बने भव्य राम मंदिर की, जहां अब प्रथम तल पर प्रभु श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी का दरबार पूरी दिव्यता के साथ विराजमान हो चुका है.
हालांकि इस दरबार के पीछे एक गहरी साधना है. राजस्थान के मूर्तिकार सत्यनारायण पांडेय की साधना. उन्होंने आठ महीने तक रोजाना दो घंटे प्रभु राम की परिक्रमा की. उसके बाद शुरू होता था उनका 10 घंटे का कठिन श्रम, राम दरबार की मूर्तियों को गढ़ने का.
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