दिल्ली हाईकोर्ट ने आज मंगलवार को अहम फैसले में कहा कि मर्डर करने के इरादे से की गई घरेलू हिंसा के अपराधों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और वैवाहिक संबंध ऐसे मामलों में अपराध को कम करने वाला कारक नहीं हो सकता है. साथ ही कोर्ट ने आरोपी को जमानत दिए जाने से जुड़ी याचिका खारिज कर दी. मृतका के भाई की ओर से की गई शिकायत पर केस दर्ज हुआ, जिसमें कहा गया था कि आरोपी पहले से आपराधिक गतिविधियों में शामिल था.
जमानत याचिका से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सवर्णा कांता शर्मा ने कहा, “घरेलू हिंसा के अपराधों को, जिनमें हत्या किए जाने का भी इरादा हो, गंभीरता से लिया जाना चाहिए. ऐसे मामलों में वैवाहिक संबंध को अपराध को कम करने वाला कारक नहीं, बल्कि गंभीर बनाने वाला माना जाएगा.” कोर्ट भारतीय दंड संहिता (IPC, 1860) की धारा 307 और 506 तथा आर्म्स एक्ट, 1959 की धारा 25, 27, 54 और 59 के तहत दर्ज एक मामले में जमानत की मांग करने वाली एक आरोपी द्वारा दायर याचिका पर विचार कर रहा था.
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