राज्यसभा में मनोनीत हुए सदस्य सदानंदन मास्टर को यहां तक पहुंचने से पहले कई तरह की कठिनाइयों से होकर गुजरना पड़ा. 25 जनवरी 1994 का वह काला दिन शायद ही सदानंद मास्टर कभी भूल पाएंगे. उस दिन उनके ऊपर अचानक हुए हमले में उन्होंने अपने दोनों पैर गंवा दिए. सदानंदन ने अपनी शारीरिक विकलांगता को कभी अपनी सोच पर हावी नहीं होने दिया. उन्होंने धमकियां मिलने के बावजूद भी लोगों के हित के लिए सामाजिक और राजनीतिक कार्य करना जारी रखा.
बता दें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्यसभा के लिए 4 सदस्यों को मनोनीत किया है. इन सदस्यों में प्रख्यात वकील उज्जवल निकम, पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला, सामाजिक कार्यकर्ता सदानंदन मास्टर और शिक्षा के क्षेत्र में निपुण मीनाक्षी जैन शामिल हैं. मनोनीत किए गए इन चारों सदस्यों ने अपने-अपने क्षेत्रों में महारत हासिल की है.
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