नीट यूजी 2024 परीक्षा पेपर लीक मामले में सुनवाई के दौरान आज, 2 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नीट का पेपर केवल पटना और हजारीबाग में ही लीक हुआ था. पेपर बड़े पैमाने पर पेपर नहीं लीक हुआ. वहीं सीजेआई ने कहा कि यदि किसी छात्र को दिए गए फैसले पर कोई दिक्कत है, तो वह हाईकोर्ट जा सकता है.
सीजेआई ने कहा कि सरकार द्वारा जो कमेटी गठित की गई है. उसमें एक मूल्यांकन कमेटी शामिल होगी. उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली की साइबर सुरक्षा में संभावित कमजोरियों की पहचान करने के लिए तकनीकी विकसित करने की जरूरत है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिस्टमैटिक ब्रीच नहीं था. पेपर लीक सिर्फ पटना और हजारीबाग तक सीमित था. वहीं SC ने केंद्र द्वारा नियुक्त के. राधाकृष्णन विशेषज्ञ समिति के लिए अतिरिक्त नियम और शर्तें निर्धारित की हैं.
क्यों नहीं रद्द की गई परीक्षा?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि परीक्षा के आयोजन में कोई व्यवस्थागत कमी नहीं पाई गई. अगर परीक्षा को रद्द किया जाता, तो लाख स्टूडेंट्स इससे प्रभावित होते, जो परीक्षा में शामिल हुए थे. वहीं एग्जाम पास करने वाले छात्रों पर इसका विपरीत असर पड़ता. ऐसे में पूरी जांच और सभी बिंदुओं पर विचार के बाद परीक्षा नहीं रद्द करने का फैसला किया गया.
SOP तैयार करने के निर्देश
परीक्षा और इसकी प्रक्रियाओं की पवित्रता और अखंडता सुनिश्चित करने के लिए तंत्र विकसित करने और उम्मीदवारों के प्रतिरूपण को रोकने के लिए भी दिए निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने दिए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निजता के अधिकार से समझौता किए बिना तकनीकी इनोवेशन और उम्मीदवारों की पहचान की समय-समय पर जांच यह सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है कि कोई भी उम्मीदवार परीक्षा के लिए प्रॉक्सी न रखे.
SC ने की NTA की आलोचना
CJI डी वाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि सभी परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी निगरानी होनी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने प्रणालीगत उल्लंघन नहीं होने की बात दोहराते हुए पेपर लीक, गलत प्रश्न पत्र के वितरण और भौतिकी के प्रश्न के गलत विकल्प के लिए अंक देने पर NTA की आलोचना भी की.
केंद्र सरकार और NTA की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वासन दिया कि नीट और एनटीए द्वारा आयोजित अन्य परीक्षाओं की सुरक्षा, पवित्रता और अखंडता बढ़ाने के लिए उसके सभी निर्देशों को लागू किया जाएगा.
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