रक्षा मंत्रालय का बड़ा फैसला: DRDO की पारंपरिक मिसाइल तकनीक भारतीय उद्योगों को होगी ट्रांसफर

देश

नई दिल्ली: ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को सशक्त बनाने की दिशा में रक्षा मंत्रालय ने एक युगांतरकारी कदम उठाया है। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित सभी पारंपरिक मिसाइल प्रणालियों की अत्याधुनिक तकनीक (Technology Transfer) भारतीय रक्षा उद्योगों को सौंपने की औपचारिक मंजूरी दे दी है। इस ऐतिहासिक निर्णय के तहत अब निर्धारित योग्यता, सुरक्षा प्रमाणन और नियामकीय मानकों को पूरा करने वाली भारतीय निजी व सार्वजनिक कंपनियां DRDO की तकनीकों के आधार पर देश में ही स्वदेशी मिसाइल सिस्टम का निर्माण कर सकेंगी।

🏭 घरेलू उत्पादन को रफ्तार: MSME और टेक्नोलॉजी पार्टनर्स को मिलेंगे नए अवसर

औद्योगिक उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला का विस्तार:

  • बड़े पैमाने पर विनिर्माण: इस कदम से मिसाइलों के अनुसंधान और विकास (R&D) से लेकर उनके बड़े पैमाने पर औद्योगिक उत्पादन (Mass Production) तक की प्रक्रिया काफी तेज व सुगम हो जाएगी।

  • DRDO का तकनीकी सहयोग: DRDO भारतीय कंपनियों के साथ मिलकर अत्याधुनिक तकनीकों के हस्तांतरण और उनके सफल संचालन में पूर्ण तकनीकी सहयोग प्रदान करेगा।

  • MSME की भागीदारी: इस नीतिगत पहल से देश के रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलेगी, जिससे भारतीय MSME कंपनियों और स्टार्टअप्स के लिए वैश्विक रक्षा सप्लाई चेन में शामिल होने के व्यापक द्वार खुलेंगे।

📉 हथियारों के आयात पर घटेगी निर्भरता, स्वदेशी रक्षा तंत्र होगा मजबूत

आर्थिक और सामरिक आत्मनिर्भरता:

  • आयात में कमी: सरकार की इस दूरगामी रणनीति का मुख्य उद्देश्य विदेशी हथियारों और उपकरणों के आयात पर निर्भरता को समाप्त करना और घरेलू वैल्यू एडिशन को अधिकतम स्तर तक ले जाना है।

  • भूमिकाओं का स्पष्ट विभाजन: नई व्यवस्था के तहत DRDO अत्याधुनिक तकनीक के अनुसंधान, नवाचार और विकास पर ध्यान केंद्रित करेगा, जबकि भारतीय उद्योग उस नवाचार को बड़े पैमाने पर उत्पादन में बदलने का कार्य करेंगे।

💡 क्या है ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी (ToT) और इसके क्या हैं मायने?

प्रक्रिया और विनियामक शर्तें:

  • ToT की कार्यप्रणाली: ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी (ToT) व्यवस्था के तहत, सरकारी अनुसंधान संस्थानों द्वारा विकसित बौद्धिक संपदा और तकनीक को निर्धारित शर्तों, लाइसेंसिंग और सुरक्षा मंजूरी के साथ योग्य कंपनियों को सौंपा जाता है।

  • उत्पादन का मार्ग: आवश्यक योग्यता पूरी करने के उपरांत कंपनियां इन डिजाइनों और फॉर्मूलों के आधार पर मिसाइलों की टेस्टिंग, असेंबलिंग और व्यावसायिक निर्माण शुरू करती हैं।

  • आगामी चरण: यद्यपि रक्षा मंत्रालय ने तकनीकी हस्तांतरण को हरी झंडी दे दी है, किंतु किन विशिष्ट निजी कंपनियों को किन मिसाइल प्रणालियों की तकनीक सौंपी जाएगी, इसकी विस्तृत सूची सुरक्षा समीक्षा के बाद जारी की जाएगी।

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