‘मृत्यु नहीं मोक्ष मिला’… महाकुंभ में मरने वालों पर ये क्या बोल गए बाबा बागेश्वर?

उत्तर प्रदेश

एमपी के छतरपुर के गढ़ा गांव में स्थित बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने महाकुंभ में मची भगदड़ में मरने वालों पर कहा है कि जो लोग गंगा के किनारे मरे हैं उन्हें मोक्ष मिला है. पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के अलावा इस कार्यक्रम में कई साधु-संत दिखाई दे रहे हैं. कई लोग उनकी इस बात में हामी भरते हुए नजर आ रहे हैं.

महाकुंभ में भगदड़ में अब तक 49 लोगों की मौत की बात सामने आई है जिसमें 25 लोगों की शिनाख्त हो चुकी है जबकि 24 अज्ञात लोगों की लिस्ट भी जारी की गई है. प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान आधी रात के समय मची भगदड़ मची थी. इस घटना से संबंधित जानकारी सोशल मीडिया पर अलग-अलग रिपोर्ट्स के रूप में सामने आई हैं. मृतकों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है. घटनाक्रम ने देश भर के लोगों के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. कई स्थानों पर इस विषय पर चर्चा की जा रही है.

ऐसे हालातों में बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है. जिसमें वह भगदड़ की घटनाओं पर टिप्पणी करते हुए दिखाई दे रहे हैं. उनके इस कार्यक्रम में कई साधु-संत मंच पर बैठे हैं. ऐसा लग रहा है जैसे यह वक्तव्य वह महाकुंभ के दौरान किसी कार्यक्रम में दे रहे हैं. बाबा ने कहा कि ‘देश में हर दिन कई लोगों की मौत हो रही है, कुछ दवाओं के बिना, कुछ स्वास्थ्य सेवाओं के बिना और कुछ हार्ट अटैक से.’ बाबा ने कहा कि यह घटना बहुत ही निंदनीय है लेकिन मृत्यु तो सभी को आनी है.

जिनकी मृत्यु हुई उन्हें मिला मोक्ष

बाबा ने आगे कहा कि हर किसी को एक दिन मरना है लेकिन अगर कोई गंगा के किनारे मरेगा तो वह मरेगा नहीं, बल्कि मोक्ष पाएगा. बाबा बागेश्वर ने इस पर जोर देते हुए कहा कि जिनकी मृत्यु असमय हुई है उनके लिए दुख है, लेकिन उन्होंने मोक्ष को प्राप्त किया है.

सोशल मीडिया पर वायरल

सोशल मीडिया पर बाबा का ये बयान काफी चर्चा में है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कई यूजर्स इस पर अपने-अपने विचार व्यक्त कर रहे हैं. कुछ लोग इस पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि कुछ इसे धार्मिक दृष्टिकोण से सही मान रहे हैं. इस विवादास्पद बयान ने महाकुंभ की भगदड़ और उससे जुड़ी घटनाओं को एक नया मोड़ दिया है. बाबा बागेश्वर को इस बयान पर आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ रहा है. कई लोगों का मानना है कि इस तरह के बयान से मृतकों और उनके परिवारों की पीड़ा को कम नहीं किया जा सकता.

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