मामला लोह लंगर की जमीन का, रेवेन्यू अधिकारियों के साथ इन अधाकिरयों पर गिरेगी गाज!

पंजाब

लुधियाना : करोड़ो रुपए की कीमत वाली ग्यासपुरा, गरीब नगरी और जसपाल बांगड़ में पड़ी लोह लंगर की जमीन के मामले में इंतकाल दर्ज करने वाले तहसीलदार, पटवारियों के साथ नगर निगम के अधिकारियो पर भी शिकंजा कसना तय है जिन्होंने लगातार मिल रही शिकायतों के बावजूद दान की जमीन पर हो रहे नजायज निर्माण को रोकने की जगह आंखे मूंदे रखी थी !

लोह लंगर की जमीन को हड़पने के खेल में धीरे धीरे सभी परतें खुलती जा रही है , सभी नियमो को ताक पर रखते हुए लाखों रुपए की रिश्वत वसूलने वाले जिस तहसीलदार खिलाफ अब डीसी दफ्तर ने विजिलेंस को जांच करने की सिफारिश की है उसके द्वारा ही ज्यादातर रजिस्ट्रियां भी तस्दीक करने के सबूत सामने आये है , आरोपों से घिरे जिस तहसीलदार ( रिटायर्ड ) पर 22.50 लाख रुपए रिश्वत लेने के आरोप जमीन का इंतकाल अपने नाम करवाने वाले शिकायतकर्ता ने लगाए थे और एस.डी.एम. द्वारा की जांच में इन आरोपों की पुष्टि की गई थी, उस फाइल को भी अब विजिलेंस खंगालने जा रही है जिसमे तहसीलदार खिलाफ प्रशासन की तरफ से तुरंत कड़ी विभागीय करवाई करने की जगह उल्टा एक ए.डी.सी. रेंक के एक पी.सी.एस. अधिकारी द्वारा आरोप साबित होने के बावजूद शिकायत को दाखिल दफ्तर करने की सिफारिश की चर्चा के बाद डीसी ने उस पर अपना नॉट देते हुए इसे एक गंभीर मामला बताते आरोपी तहसीलदार खिलाफ कड़ी करवाई की सिफारिश तो की लेकिन कई माह गुजर जाने के बावजूद उक्त फाइल ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है !

लोह लंगर की जमीन को गैरकानूनी ढंग से खरीदने के बाद शहर के एक चर्चित कालोनाइजर की तरफ से गरीब नगरी में दर्जनों रजिस्ट्रियां करवाने का मामला सहमने आया है, चंद माह पहले साहनेवाल पुलिस स्टेशन में दर्ज लोह लंगर जमीन से संबंधित मामले में पुलिस द्वारा इस कालोनाइजर को पकड़ कर जेल भी भेजा जा चूका है, रेवन्यू रिकॉर्ड में साफ है कि सबसे ज्यादा रजिस्ट्रियां इसी व्यक्ति द्वारा करवाई गई थी और उसका मुख्यत: निशाना प्रवासी और गरीब तबके के लोग थे, जिन्हे अपने जाल में फंसाने के लिए उसने किश्तों पर छोटे छोटे प्लॉट्स गरीब परिवारों को बेचे थे, जिनसे बकायदा हर माह किश्त के रूप में रकम वसूली जा रही है।

उधर इस मामले को पहले विजिलेंस और बाद में उच्च अदालत में लेकर जाने वाले आरटीआई एक्टविस्ट की माने तो उसकी तरफ से लोह लंगर की जमीन पर हो रहे नजायज निर्माण को रोकने के लिए लगातार नगर निगम के उच्च अधिकारी से लेकर एरिया के एटीपी को सूचित किया जाता रहा था , बावजूद इसके लेंड माफिया के साथ सांठगांठ के चलते निगम अधिकारियो ने भी चल रहे नजायज निर्माण को रोकने का प्रयास नहीं किया जिसकी वजह से इस जमीन पर सेंकडो मकान और फैक्ट्रिया बन चुकी है , ग्यासपुरा एरिया में तो माफिया ने जानबूझ कर गरीब लोगो को 50-50 गज के प्लाट किश्तों पर बेच दिए गए ताकि भविष्य में अगर सरकार या प्रशासन इस तरफ कोई कड़ी करवाई करते है तो सीधे गरीब परिवारों के साथ टकराव के हालात पैदा हो, लोग लंगर की इस जमीन की हुई रजिस्ट्रियों में बेचने वालों में कई सफेदपोश ऐसे भी है जिनके खिलाफ कड़े सबूत होने के बावजूद कोई करवाई नहीं की गई। बता दें कि गरीब परिवारों को किस्तों पर प्लाट बेचने वाले अभी भी लगातार उनसे रकम वसूल रहे है जिस संबंधी कई एग्रीमेंट पंजाब केसरी के पास आ चुके है !सरकार तुरंत लोह लंगर की जमीनों पर दे ध्यान — उधर भाजपा नेताओं जगमोहन शर्मा , गुरदेव शर्मा देबी , अमरजीत सिंह टिक्का ने कहाकि पंजाब में लोह लंगर से संबंधित हजारो एकड़ जमीन पड़ी हुई है जिसकी कीमत करोड़ो में है और ऐसी जमीने शहर में आने के कारण लेंड माफिया और सियासी सरक्षण पिछले कुछ वर्षो से धीरे धीरे इसे हड़पने में सफल हो रहा है , इस लिए पंजाब सरकार को चाहिए की वो तुरंत राज्य में पड़ी लोग लंगर की जमीनों की पहचान कर इन पर हुवे नजायज कब्जो को हटाने और इसे बेचने वालो खिलाफ कड़ी करवाई करे , भविष्य में इन जमीनों को बचाने के लिए बकायदा एक कमेटी का गठन किया जाये !

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