महाराष्ट्र में बुधवार को विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग हुई. राज्य की 288 विधानसभा सीटों पर मतदान हुआ. वोटिंग को लेकर लोगों में उत्साह देखा गया. चुनाव आयोग के मुताबिक, महाराष्ट्र में 65.11 प्रतिशत वोटिंग हुई, जो पिछले 30 साल में सबसे अधिक है. इससे पहले 1995 के विधानसभा चुनाव में महाराष्ट्र में 71.69 प्रतिशत वोटिंग हुई थी.
इस साल हुए लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र में 61.39 प्रतिशत मतदान हुुआ था. वहीं 2019 के विधानसभा चुनाव में 61.4 प्रतिशत वोटिंग हुई थी. महाराष्ट्र में मतदान प्रतिशत में बढ़ोतरी का श्रेय काफी हद तक सत्तारूढ़ महायुति और महा विकास अघाड़ी (एमवीए) की ओर से किए गए प्रचार अभियानों को दिया जा रहा है. लोकसभा चुनाव में महायुति को कुल 42.71 प्रतिशत वोट मिला था, जबकि महाविकास अघाड़ी के खाते में 43.91 प्रतिशत वोट आए थे.
महाराष्ट्र में इस बार किंग कौन बनेगा, मतदान प्रतिशत में कम से कम 3.5 प्रतिशत का उछाल यह तय करने में अहम हो सकता है. 2019 में महाराष्ट्र में 8.85 करोड़ मतदाता थे, जो 2024 में बढ़कर 9.69 करोड़ हो गए. इसमें से 5 करोड़ पुरुष और 4.69 महिला मतदाता हैं. चुनाव आयोग के मुताबिक, मैदान में 4136 उम्मीदवार हैं. इसमें से 3771 पुरुष और 363 महिला वोटर्स हैं.
बीजेपी-कांग्रेस का क्या कहना है?
कहा जा रहा है कि ज्यादा वोटिंग का फायदा सत्तारूढ़ गठबंधन महायुति को हो सकता है. उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि जब भी वोटिंग प्रतिशत बढ़ा है उसका फायदा बीजेपी को हुआ है. ये सच है कि पिछले चुनावों के मुकाबले इस बार के विधानसभा चुनावों में मतदान प्रतिशत बढ़ा है. इसका फायदा बीजेपी और महायुति दोनों को होगा.
वहीं महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा कि MVA चुनाव जीत रहा है. लोगों में उत्साह है. महाराष्ट्र के स्वाभिमानी नागरिक एक ऐसी सरकार का चुनाव करेंगे जो राज्य के कल्याण को प्राथमिकता देगी. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी. राज्य में महा विकास अघाड़ी सरकार का गठन निश्चित है.
1995 में किसकी बनी थी सरकार
महाराष्ट्र में 30 साल बाद इतनी वोटिंग हुई है. इससे पहले 1995 में 71.69 प्रतिशत मतदान हुआ था. तब राज्य में शिवसेना की सरकार बनी थी. मनोहर जोशी मुख्यमंत्री बने थे. दो चरणों में वोटिंग हुई थी. 12 फरवरी, 1995 और 9 मार्च. नतीजे 13 मार्च को घोषित हुए थे.
तब अविभाजित शिवसेना और बीजेपी का गठबंधन था. मनोहर जोशी राज्य के 12वें मुख्यमंत्री बने थे. महाराष्ट्र में पहली बार गैर कांग्रेस सरकार बनी थी. उस चुनाव में कांग्रेस को 80, शिवसेना को 73 और बीजेपी को 65 सीटों पर जीत मिली थी.
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