उज्जैन: महाकाल नगरी उज्जैन में लावारिस लाशों की संख्या में असामान्य बढ़ोतरी ने प्रशासन और समाज दोनों के लिए चिंता का विषय बना दिया है। समाजसेवी और लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करने वाले अनिल डागर के अनुसार, जहां पहले एक साल में लगभग 30-35 लाशें मिलती थीं, वहीं इस साल मात्र तीन माह में 96 शव पुलिस थानों के माध्यम से आए हैं।
महज 36 दिनों में 30 से अधिक शव
अगस्त से 5 सितंबर तक के केवल 36 दिनों में 30 से अधिक लाशों का अंतिम संस्कार किया गया। सबसे अधिक लाशें महाकाल और देवासगेट थाना क्षेत्रों से मिली हैं। शहर में इस समस्या को लेकर प्रशासन और नगर निगम की लापरवाही पर भी सवाल उठ रहे हैं।
बाहर से आए भिक्षु बढ़ा रहे खतरा
अनिल डागर का कहना है कि इंदौर, देवास, भोपाल, रतलाम और नीमच से भिक्षुओं का आगमन उज्जैन में बढ़ गया है। कई भिक्षु बीमारी, भूख या असुरक्षित परिस्थितियों के कारण जान गंवा रहे हैं, और उनके शव लावारिस हाल में मिल रहे हैं।
शहर की छवि पर असर
डागर ने चेतावनी दी कि नगर निगम, जनप्रतिनिधि और प्रशासन ने इस समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। महाकाल लोक की अंतरराष्ट्रीय छवि उज्जैन के लिए गर्व का विषय है, लेकिन लगातार बढ़ती लावारिस लाशें इस छवि को धूमिल कर रही हैं। न तो इनके लिए आश्रय, स्वास्थ्य जांच या पुनर्वास की कोई व्यवस्था है, और न ही इनका अंतिम संस्कार करने के पर्याप्त साधन मौजूद हैं। हालांकि पूर्व निगमायुक्त आशीष पाठक ने लाशों के बढ़ते आंकड़ों पर पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर इन शवों के स्रोत का पता लगाने की बात कही थी, लेकिन उनका स्थानांतरण होने के बाद यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
8 थाना क्षेत्रों में मिले 96 अज्ञात शव
बता दें कि महाकाल थाना क्षेत्र में 11, कोतवाली में 7, वासगेट से 18, जीवाजीगंज से 7, चिमनगंज से 6, नीलगंगा से 5, खाराकुआं से 1, भैरवगढ़ से 11, नरवर से 7, माधवनगर, नागझिरी, थमहल और राघवी में एक एक शव, तराना में 9, घट्टिया में 4, पवासा में 2, चिंतामन में 3 और जीआरपी मे 1 अज्ञात शव बरामद हुआ है
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