इंदौर। ‘महाकाल की नगरी में उज्जैन नगर निगम के अधिकारी अकाल ढा रहे हैं। सरकार जांच करे। अगर वास्तव में उज्जैन नगर निगम की आर्थिक स्थिति इतनी बदहाल है कि वह ठेकेदारों को भुगतान ही नहीं कर पा रहा है, तो सरकार इसे अपने अधीन ले ले।’
यह तल्ख टिप्पणी मप्र हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत ने उज्जैन नगर निगम से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए की है। चीफ जस्टिस मंगलवार को हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में मामलों की सुनवाई कर रहे थे।
अधिकारियों का वेतन आधा कर दें
चीफ जस्टिस ने अपने फैसले में आगे कहा कि जब तक ठेकेदारों का भुगतान नहीं हो जाता, तब तक राजपत्रित अधिकारियों का वेतन आधा कर दें। इस मामले में नगर निगम चार सप्ताह में ठेकेदार को पूरा भुगतान करें। अगर ऐसा नहीं किया तो उज्जैन निगमायुक्त के खिलाफ अवमानना का मामला चलेगा।
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