उत्तर प्रदेश के मेरठ में पंडित प्रदीप मिश्रा की कथा में भगदड़ मच गई, जिसमें कई महिलाएं घायल हो गईं. मेरठ में पंडित प्रदीप मिश्रा की कथा का आज छठा दिन था. मौके पर पुलिस पहुंच गई है और बचाव कार्य में जुटी हुई है. प्रदीप मिश्रा पिछले कुछ महीनों से अपने विवादित बयान की वजह से सुर्खियों में बने हैं. लोग प्रदीप मिश्रा के राधा रानी वाले बयान से इतना नाराज हो गए थे कि उज्जैन में उनकी कथा का बहिष्कार तक कर दिया गया. ऐसे में प्रदीप मिश्रा को बरसाना पहुंचकर राधारानी के मंदिर में जाकर नाक रगड़कर माफ़ी मांग पाश्चाताप किया.
पंडित प्रदीप मिश्रा इंटरनेशनल कथावाचक हैं. नए साल से पहले उनके पास इतने कार्यक्रम हैं कि सीहोर वाले पंडित जी के पास जरा सा भी वक्त नहीं है. पहले से तय कार्यक्रमों के अनुसार देशभर में वे महाशिवपुराण कथा सुना रहे हैं. प्रदीप मिश्रा की कथा सुनने लाखों लोग आते हैं. ऐसे में क्या आप जानते हैं बेहद गरीब रहे पंडित प्रदीप मिश्रा इतने बड़े कथावाचक कैसे बन गए. चलिए हम बताते हैं.
स्कूल के दिनों में ही करते थे भजन कीर्तन
पंडित प्रदीप मिश्रा का जन्म मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में 1980 को हुआ था. प्रदीप मिश्रा का उपनाम रघुराम है. गरीब परिवार से होने के कारण उनका बचपन बड़ी सामान्य तरीके से बीता.उन्होंने ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई की, जिसके बाद उन्होंने स्कूल में पढ़ाना शुरू कर दिया और साथ में पंडिताई का काम भी करने लगे. बचपन से ही पंडित प्रदीप मिश्रा को भक्ति भजन में बहुत रुचि थी. हालांकि घर की हालत खराब होने की वजह से उन्हें अन्य काम भी करना पड़ता था. स्कूल के दिनों में ही पंडित मिश्रा भजन कीर्तन किया करते थे.
किसने किया कथा वाचक बनने के लिए प्रेरित?
प्रदीप मिश्रा को सीहोर में ही एक ब्राह्मण परिवार की गीता बाई पराशर नाम की महिला ने कथा वाचक बनने के लिए प्रेरित किया था. प्रदीप को गीता बाई ने विठलेश राय काका जी की गुरु दीक्षा के लिए इंदौर भेजा, जहां से उन्होंने उन्होंने दीक्षा लेकर पुराणों का ज्ञान प्राप्त किया. इसके बाद पंडित प्रदीप मिश्रा ने शिव मंदिर में कथा वाचना शुरू कर दिया. प्रदीप मिश्रा ने सीहोर में ही पहली बार कथा वाचक के रूप में कथा सुनाई थी. पंडित प्रदीप मिश्रा अपने कथा कार्यक्रम में ‘एक लोटा जल समस्या का हल’ बात कहते थे. इसके अलावा प्रवचन में शिवपुराण की कथा सबसे ज्यादा करते हैं और लोगों की समस्याओं का उपाय भी बताते हैं. प्रदीप मिश्रा की इन बातों को लोग धीरे धीरे काफी पसंद करने लगे, जिसकी वजह से वो देखते ही देखते प्रसिद्ध हो गए.
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