जालंधर: पिछले कुछ दिनों से पड़ रही बारिश के चलते बिजली के फाल्ट पड़ने का आकंड़ा 10,000 से ऊपर जा पहुंचा है। इससे यह बात साफ हो चुकी है कि पावरकॉम का सिस्टम बारिश झेलने में बेबस और असमर्थ है। शहर के कई मोहल्लों में सुबह से गुल हुई बिजली देर शाम तक ठीक नहीं हो पाई। कई इलाकों में 8 घंटे तक बिजली सप्लाई गुल रहने की खबरें सामने आई है।
फाल्ट के बाद शिकायत लिखवाना भी आसान नहीं है, पावरकॉम के शिकायत केन्द्र का नंबर 1912 न मिलने से लोगों में रोष बढ़ाता जा रहा है। वहीं शिकायत घरों में भी ताले लटकते हुए नजर आते हैं। लोगों का कहना है कि शिकायत होने के बाद भी कर्मचारी देरी से मौके पर पहुंच रहे हैं। इसी क्रम में घंटों तक कर्मचारियों के न पहुंचने के कारण 15-20 मिनट में ठीक होने वाले फाल्ट के लिए घंटों तक इंतजार करना पड़ता है। अधिकारियों का कहना है कि स्टाफ की शार्टेज चल रही है जिसके चलते देरी हो जाती है।
आज शहर के दर्जनों इलाकों में 8 घंटें व इससे अधिक समय तक बत्ती गुल रही जिससे लोगों को भारी परेशानियां उठानी पड़ी। लोगों का कहना है कि विभाग को अपने सिस्टम में सुधार करना चाहिए। अधिकारी सिस्टम पर करोड़ों रुपए खर्च करने की बात करते हुए निर्विघ्न सप्लाई के बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन बारिश और आंधी में विभागीय सिस्टम जवाब दे जाता है और शिकायतों की झड़ी लग जाती है। सुबह से हो रही हलकी बारिश के चलते विभिन्न इलाकों में बिजली खराबी उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का सबब बनी। इसके चलते जालंधर सर्कल की प्रत्येक डिवीजन के अन्तर्गत सैकड़ों शिकायतें प्राप्त हुई, जिससे लोगों का हाल बेहाल हुआ। परेशानी का मुख्य कारण यह रहा कि कई इलाकों में बिजली गुल होने के कारण पानी को लेकर भी परेशानी उठानी पड़ी।
रात 10 बजे तक फाल्ट ठीक करने में जुटे रहे कर्मचारी
वहीं, कई इलाकों में रात को 10 बजे बिजली कर्मचारी टैंपरेरी लाइट की सहायता से फाल्ट ठीक करते हुए देखे गए। उपभोक्ता बिजली कर्मचारियों के साथ मौके पर उनकी मदद करते हुए नजर आए। सीढ़ी इत्यादि का प्रबंध करने को लेकर लोगों को परेशान होते देखा गया। वहीं, कई इलाकों में स्ट्रीट लाइटें भी नहीं जल पाई और राहगीरों को आने-जाने में भी भारी परेशानी उठानी पड़ी।
मशक्कत के बीच अधिकारी परेशान
नाम न छापने की सूरत में अधिकारियों ने कहा कि स्टाफ शार्टेज के चलते वह खुद लाचार महसूस कर रहे है। वहीं, यह परेशानी आने वाले दिनों में और भी बढ़ सकती है। यदि बारिश जारी रही तो फाल्ट की संख्या और बढ़ेगी जिससे अधिकारियों को लोगों के फाल्ट हल करवाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी।
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