बरेली: स्कूल में पढ़ी नमाज…प्रिसिंपल का वीडियो हुआ वायरल, छात्र बोले- रोज करते हैं ये काम

उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश के बरेली के आंवला थाना क्षेत्र के एक स्कूल का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें स्कूल के अंदर प्रिंसिपल नमाज पढ़ते हुए नजर आ रहे हैं. ये मामला ग्राम रसूला स्थित प्राथमिक विद्यालय से सामने आया है, जहां से प्रिंसिपल का स्कूल में नमाज़ पढ़ने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इस वीडियो के सामने आते ही हड़कंप मच गया और हिंदू संगठनों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई.

स्कूल के कुछ छात्रों ने बताया कि यह पहली बार नहीं है, जब हेडमास्टर ने स्कूल के अंदर नमाज अदा की हो. बच्चों का कहना है कि स्कूल के समय के दौरान प्रिंसिपल रोज क्लासरूम में बैठकर नमाज़ पढ़ते हैं. इससे बाकी छात्रों की पढ़ाई भी बाधित होती है और माहौल भी प्रभावित होता है. अब प्रिंसिपल का नमाज पढ़ते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

सीएम से की कार्रवाई की मांग

हिंदू संगठनों और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस घटना को गंभीरता से लिया है. हिंदू युवा नेता हिमांशु पटेल ने इस वीडियो को एक्स पर शेयर करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सख्त कार्रवाई की मांग की. उन्होंने लिखा, “शिक्षा के मंदिर में इस तरह की धार्मिक गतिविधियां न केवल अनुचित हैं. बल्कि यह बच्चों की सोच पर भी गलत प्रभाव डाल सकती हैं.”

अधिकारियों ने स्कूल का दौरा किया

हिमांशु पटेल ने ये भी लिखा कि स्कूलों को धर्मनिरपेक्ष स्थान माना जाता है, लेकिन इस तरह की गतिविधियां वहां की मर्यादा को भंग कर रही हैं. उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई हिंदू शिक्षक स्कूल में मंदिर या यज्ञ की बात करे तो उस पर तुरंत कार्रवाई हो जाती है, लेकिन इस तरह की घटनाओं में प्रशासन चुप क्यों रहता है. मामले की जानकारी लगते ही थाना आंवला पुलिस और शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने स्कूल का दौरा किया और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है.

प्रिंसिपल को दिया गया नोटिस

अब स्कूल के प्रिंसिपल से पूछताछ की जा रही है. साथ ही वीडियो की सत्यता को भी परखा जा रहा है. बेसिक शिक्षा अधिकारी ने बताया कि अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो प्रिंसिपल के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल उन्हें नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है. गांव रसूला के लोग इस मामले में दो पक्षों में बंट गए हैं. कुछ लोग प्रिंसिपल के समर्थन में हैं और इसे उनकी धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं. वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इस कार्य को अनुशासनहीनता और बच्चों के लिए गलत उदाहरण मान रहे हैं.

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